पाकिस्तान में बाढ़ का अलर्ट, लेकिन वजह सिर्फ ‘भारत ने पानी छोड़ा’ नहीं; सलाल डैम पर क्या हो रहा है समझिए
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रशासन ने चिनाब नदी में संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है. सियालकोट, मराला बैराज और आसपास के क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रशासन ने चिनाब नदी में संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है. सियालकोट, मराला बैराज और आसपास के क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है.
हालांकि, पूरे मामले को केवल “भारत ने पानी छोड़ा” कहकर समझना अधूरा होगा. जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित सलाल डैम पर सिल्ट फ्लशिंग प्रक्रिया चल रही है. इस प्रक्रिया के दौरान डैम में जमा गाद (सिल्ट) को बाहर निकालने के लिए स्पिलवे गेट खोले जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए नदी में पानी का बहाव बढ़ सकता है. भारतीय अधिकारियों ने भी स्थानीय क्षेत्रों में पहले से सावधानी बरतने की सलाह दी थी.
क्या है सलाल डैम?
सलाल डैम जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बना भारत का एक प्रमुख जलविद्युत परियोजना केंद्र है. यह लगभग 130 मीटर ऊंचा बांध है और इससे करीब 690 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है. यह भारत की शुरुआती बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाओं में शामिल है. बांध के पीछे बड़े पैमाने पर पानी जमा होता है, इसलिए समय-समय पर सिल्ट हटाने की प्रक्रिया जरूरी होती है ताकि बिजली उत्पादन और जल प्रवाह प्रभावित न हो.
पाकिस्तान ने क्या-क्या कदम उठाए?
संभावित खतरे को देखते हुए पाकिस्तान प्रशासन ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं—
- पंजाब प्रांत की इमरजेंसी सर्विस को हाई अलर्ट पर रखा गया
- सियालकोट और मराला बैराज क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई
- जिला स्तर पर इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए
- नदी किनारे लोगों की आवाजाही सीमित करने के निर्देश दिए गए
- पशुओं को नदी तलहटी में ले जाने से मना किया गया
- चिनाब नदी की 24 घंटे निगरानी शुरू की गई
- आपदा प्रबंधन एजेंसियों को लगातार अपडेट देने के आदेश जारी हुए
सिंधु जल संधि से क्यों जुड़ रहा मामला?
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत चिनाब, झेलम और सिंधु जैसी पश्चिमी नदियों के उपयोग को लेकर नियम तय किए गए थे. पिछले कुछ वर्षों में भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ने के बाद इस संधि और जल प्रबंधन से जुड़े मुद्दे फिर चर्चा में आए हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि डैम के गेट खोलने की हर घटना को राजनीतिक विवाद या जल संकट से जोड़ना जरूरी नहीं, क्योंकि कई बार यह नियमित रखरखाव और तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा होता है.
फिलहाल 21 मई से 30 मई के बीच चिनाब नदी के जलस्तर पर विशेष नजर रखी जा रही है. पाकिस्तान प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे जाने से बचने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है. आने वाले दिनों में जलस्तर की स्थिति तय करेगी कि खतरा केवल एहतियात तक सीमित रहता है या बाढ़ की आशंका बढ़ती है.

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