अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान में शिक्षा ढांचे पर संकट
ईरान में हालिया हमलों के बाद 1300 स्कूलों को नुकसान पहुंचा, जिनमें से 775 की मरम्मत पूरी हो चुकी है.अमेरिका और इजरायल पर आरोपों के बीच सरकार तेजी से पुनर्निर्माण कर रही है, जबकि छात्रों की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से जारी रखी गई है.

ईरान में हुए हमलों ने देश के नागरिक ढांचे, खासकर शिक्षा प्रणाली को गहरी चोट पहुंचाई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 1300 स्कूल इन हमलों से प्रभावित हुए, जिनमें कई पूरी तरह से नष्ट हो गए. ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है. खास बात यह है कि जिन इमारतों को नुकसान पहुंचा, वे सभी आम नागरिकों की जरूरतों के लिए बनाई गई थीं और किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि से जुड़ी नहीं थीं. इस कठिन परिस्थिति के बावजूद ईरान ने तेजी से पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य बनाना उनकी प्राथमिकता है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और वे सुरक्षित माहौल में फिर से स्कूल लौट सकें.
1300 स्कूल प्रभावित, तेजी से जारी मरम्मत कार्य
ईरान के शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजमी के मुताबिक, कुल 1300 स्कूलों को नुकसान पहुंचा, जिनमें से 775 की मरम्मत पूरी कर ली गई है. करीब 20 स्कूल पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं. सबसे ज्यादा असर तेहरान, केरमनशाह, इस्फहान और होर्मुजगन जैसे क्षेत्रों में देखा गया. सरकार ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त स्कूलों को अक्टूबर तक फिर से तैयार करने का लक्ष्य रखा है. अधिकारियों के अनुसार, हमले के तुरंत बाद ही पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था ताकि बच्चों की पढ़ाई जल्द बहाल हो सके.
संकट के बीच भी जारी रही पढ़ाई और सहयोग
युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ठप नहीं होने दिया गया. ‘ईरानी टेलीविजन स्कूल’ के माध्यम से छात्रों को घर बैठे पढ़ाई कराई गई. इसके साथ ही छात्रों और शिक्षकों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी की गई, ताकि मानसिक तनाव को कम किया जा सके. मीनाब के शजरेह तैयबा गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में 170 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकतर छात्राएं और शिक्षक थे. इस दुखद घटना की याद में विभिन्न स्कूलों में शोक सभाएं आयोजित की गईं.
बातचीत पर अड़चन और बढ़ता कूटनीतिक तनाव
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के दूत आमिर सईद इरावानी ने कहा है कि बातचीत तभी संभव होगी जब अमेरिका अपनी समुद्री घेराबंदी खत्म करेगा. उनका यह भी कहना है कि जब तक संघर्षविराम के उल्लंघन नहीं रुकते, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है. वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 3 से 5 दिन के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अल्टीमेटम दिया है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

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