बिरसा मुंडा जेल में महिला कैदी गर्भवती, काराधीक्षक पर यौन शोषण का आरोप; बाबूलाल का आरोप- IG Prisons ने दबाया मामला
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में एक महिला कैदी का कथित यौन शोषण हुआ और वह गर्भवती हो गई. बाबूलाल ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मामले को दबाने और साक्ष्य मिटाने में जुटे हैं.

Ranchi: बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार को लेकर झारखंड की राजनीति में बड़ा विस्फोट हुआ है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक तीखा पत्र लिखते हुए आरोप लगाया है कि जेल के भीतर एक महिला कैदी का कथित यौन शोषण किया गया और वह गर्भवती हो गई. इससे भी गंभीर आरोप यह है कि मामले को दबाने, साक्ष्य मिटाने और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश हुई. बाबूलाल ने दावा किया है कि कारा प्रशासन के शीर्ष अधिकारी पूरे प्रकरण में संरक्षण देने की भूमिका में हैं. पत्र में उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है और कथित आरोपी काराधीक्षक व कारा महानिरीक्षक को तत्काल हटाकर जेल भेजने की मांग की है. इन आरोपों ने जेल प्रशासन से लेकर सरकार तक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रक्षक ही भक्षक बन गए- बाबूलाल
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि उन्हें विश्वसनीय प्रशासनिक स्रोतों से जानकारी मिली है कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के भीतर एक महिला कैदी का लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया. उन्होंने दावा किया कि यह शोषण जेल के सर्वोच्च पद पर बैठे काराधीक्षक द्वारा किया गया और इसके परिणामस्वरूप महिला कैदी गर्भवती हो गई. मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि जिस कारागार की जिम्मेदारी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है, वहीं इस तरह की घटना होना राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की विफलता का संकेत है. पत्र में उन्होंने लिखा कि राज्य की राजधानी में स्थित केंद्रीय जेल के भीतर इस तरह की घटनाएं होना पूरे झारखंड की छवि को प्रभावित करने वाला मामला है.
कारा महानिरीक्षक पर साक्ष्य मिटाने के आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश हुई. उन्होंने दावा किया कि कारा महानिरीक्षक स्तर तक इस पूरे मामले को शांत कराने, फाइलों को गायब करने और आरोपी अधिकारी को संरक्षण देने के प्रयास किए जा रहे हैं. पत्र में यह भी कहा गया कि जेल के भीतर लंबे समय से एक संगठित तंत्र काम कर रहा है, जहां प्रभाव और पद का इस्तेमाल कर मामलों को दबाया जाता है. मरांडी ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों और संभावित गवाहों को प्रभावित करने के लिए दबाव और अन्य तरीकों का सहारा लिया गया. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन पत्र में लगाए गए दावे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.
महिला कैदी को बाहर ले जाने और गवाह हटाने पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में दावा किया कि पीड़ित महिला कैदी को बीमारी और इलाज के नाम पर लगातार जेल परिसर से बाहर ले जाया जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि ऐसा जैविक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जा सकता है. मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाहों को अचानक स्थानांतरित या हटाया गया है. उनके अनुसार, यदि साक्ष्यों और गवाहों से छेड़छाड़ की जा रही है तो यह मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है. उन्होंने पत्र में कहा कि साक्ष्य मिटाने और गवाहों को हटाने जैसा कदम बिना उच्च स्तर के संरक्षण के संभव नहीं माना जा सकता.
दोषी अधिकारियों को तुरंत हटाकर आपराधिक कार्रवाई की मांग
अपने पत्र के अंतिम हिस्से में बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि कथित मुख्य आरोपी काराधीक्षक और मामले को दबाने के आरोपों में घिरे कारा महानिरीक्षक को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. मरांडी ने चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि यदि इस मामले में त्वरित, पारदर्शी और दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं होती है, तो सरकार की भूमिका और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल और गंभीर होंगे.

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