शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 600 अंक टूटा, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
एशियाई बाजारों में कमजोरी और मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,450 के नीचे फिसल गया.

एशियाई बाजारों में कमजोरी और मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,450 के नीचे फिसल गया. वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया भी अपने ऑल टाइम लो पर पहुंच गया. सुबह बीएसई सेंसेक्स 532.74 अंक यानी 0.71% गिरकर 74,668.11 पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी50 इंडेक्स 166.35 अंक यानी 0.70% टूटकर 23,451.65 पर पहुंच गया.
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला. डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे टूटकर 96.96 पर खुला, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है. कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर रुपये पर भी साफ दिखाई दिया. सेंसेक्स के सभी 30 शेयर गिरावट के साथ खुले. सबसे ज्यादा कमजोरी मेटल, ऑटो, बैंकिंग और आईटी शेयरों में देखने को मिली.
गिरावट वाले प्रमुख शेयर
- टाटा स्टील
- बीईएल
- इटरनल
- मारुति सुजुकी
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- बजाज फाइनेंस
- आईसीआईसीआई बैंक
- टेक महिंद्रा
- टाइटन
- एचसीएल टेक
- एसबीआई
- बजाज फिनसर्व
- एनटीपीसी
- ट्रेंट
इनमें कई शेयरों में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव
ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली हावी रही.
- निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.83% गिरा
- निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.09% टूट गया
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो
- निफ्टी रियल्टी
- निफ्टी पीएसयू बैंक
- निफ्टी केमिकल
- निफ्टी ऑटो
में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया.
वैश्विक तनाव का असर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तनाव और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ समझौता नहीं होने पर बड़े हमले की चेतावनी दी है. इसके बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई, जिससे निवेशकों के बीच महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा गई. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

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