2 सीटें… 56 वोट… फिर भी टेंशन! झारखंड में किसका बिगड़ेगा सियासी गणित?
देश में राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव का ऐलान हो चुका है. 10 राज्यों की इन सीटों पर 18 जून को वोटिंग होगी और उसी दिन नतीजे भी आएंगे. झारखंड की 2 सीटों पर भी चुनाव होना है.

देश में राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव का ऐलान हो चुका है. 10 राज्यों की इन सीटों पर 18 जून को वोटिंग होगी और उसी दिन नतीजे भी आएंगे. झारखंड की 2 सीटों पर भी चुनाव होना है. चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन, 9 जून को जांच, 11 जून तक नाम वापसी और 18 जून को मतदान होगा. लेकिन झारखंड में असली चर्चा चुनाव तारीखों की नहीं… बल्कि उन दो सीटों के पीछे छिपे राजनीतिक गणित की है. क्योंकि यहां लड़ाई सिर्फ BJP और JMM के बीच नहीं दिख रही… गठबंधन के अंदर भी सीटों को लेकर खींचतान की संभावना है.
2 सीट… लेकिन कहानी सिर्फ चुनाव की नहीं
झारखंड में जिन दो सीटों पर चुनाव होना है, उनमें एक सीट BJP सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म होने से खाली हो रही है. दूसरी सीट पूर्व मुख्यमंत्री और JMM के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त है. यानी पिछली तस्वीर देखें तो एक सीट BJP के पास थी और दूसरी JMM के पास. लेकिन अब सवाल सिर्फ सीट बचाने या जीतने का नहीं है. ये चुनाव तय करेगा कि झारखंड में INDIA गठबंधन के भीतर सबसे मजबूत खिलाड़ी कौन है. JMM अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखना चाहेगी, वहीं कांग्रेस पहली बार संख्या बल के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी मांग सकती है. इसलिए इस चुनाव का असर राज्यसभा से आगे गठबंधन की राजनीति तक जा सकता है.
विधानसभा का गणित कहता है—INDIA गठबंधन मजबूत
राज्यसभा चुनाव में जनता वोट नहीं करती. विधायक वोट करते हैं. इसलिए सबसे अहम चीज विधानसभा का गणित है. 81 सदस्यीय विधानसभा में JMM के पास 34 विधायक हैं. कांग्रेस के पास 16, RJD के पास 4 और वाम दलों के 2 विधायक हैं. यानी INDIA गठबंधन करीब 56 वोटों तक पहुंचता दिखता है. दूसरी तरफ BJP के पास 21 विधायक हैं. AJSU, JDU और LJP (रामविलास) को जोड़ दें तो NDA लगभग 24 वोटों के आसपास बैठता है. अब राज्यसभा चुनाव का गणित समझिए—दो सीटों के लिए जीत का आंकड़ा लगभग 28 वोट प्रति सीट माना जा रहा है. यानी दोनों सीट जीतने के लिए करीब 56 वोट चाहिए. मतलब कागज पर देखें तो INDIA गठबंधन दोनों सीट निकाल सकता है. इसी वजह से पहली नजर में मुकाबला एकतरफा दिखता है. लेकिन झारखंड की राजनीति में सिर्फ संख्या बल से नतीजे तय नहीं होते.
सीट बंटवारे पर फंस सकता है मामला
कांग्रेस के अंदर लंबे समय से यह आवाज उठ रही है कि अगर गठबंधन दो सीट जीत सकता है तो एक सीट कांग्रेस के हिस्से में जानी चाहिए. क्योंकि विधानसभा में उसकी संख्या पहले से ज्यादा मजबूत हुई है. दूसरी तरफ JMM के लिए शिबू सोरेन से जुड़ी सीट सिर्फ राजनीतिक नहीं… भावनात्मक और संगठनात्मक महत्व भी रखती है. ऐसे में पार्टी दोनों सीटों पर दावा कर सकती है. यानी पहली लड़ाई BJP बनाम INDIA नहीं… बल्कि INDIA गठबंधन के अंदर JMM बनाम कांग्रेस हो सकती है. अगर समझौता हो गया—एक सीट JMM, एक कांग्रेस—तो रास्ता आसान रहेगा. लेकिन सीटों को लेकर तनातनी बढ़ी तो इसका असर वोटिंग तक दिख सकता है.
क्रॉस वोटिंग… जो कमजोर विपक्ष को भी मौका दे सकता है
राज्यसभा चुनाव में एक शब्द हमेशा चर्चा में रहता है—क्रॉस वोटिंग. कई राज्यों में ऐसे उदाहरण रहे हैं जहां विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग वोट दिया और पूरा चुनावी समीकरण बदल गया. 4–5 वोटों का अंतर भी परिणाम पलट सकता है. अगर झारखंड में उम्मीदवार चयन को लेकर नाराजगी हुई… गठबंधन के भीतर असहमति बढ़ी… या कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतरा… तो BJP कमजोर संख्या बल के बावजूद फायदा लेने की कोशिश कर सकती है. यानी BJP की उम्मीद फिलहाल सीधे वोटों से कम और गठबंधन की संभावित टूट-फूट से ज्यादा जुड़ी दिखती है.
राजनीति में आखिरी चाल बाकी
वर्तमान संख्या बल के हिसाब से देखें तो दोनों सीटों पर INDIA गठबंधन का पलड़ा भारी दिखता है. BJP के लिए दीपक प्रकाश वाली सीट बचाना आसान नहीं लगता. लेकिन झारखंड की राजनीति कई बार आखिरी समय में करवट ले चुकी है. इसलिए यह चुनाव सिर्फ 18 जून की वोटिंग से तय नहीं होगा. असली लड़ाई उम्मीदवार तय होने के दिन शुरू होगी. सवाल यही है—क्या हेमंत सोरेन गठबंधन के भीतर संतुलन बना पाएंगे? क्या कांग्रेस अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेगी? और क्या BJP कम संख्या बल के बावजूद कोई नया राजनीतिक समीकरण खड़ा कर पाएगी? झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव भले 18 जून को हो… लेकिन सियासी मुकाबला अभी से शुरू हो चुका है.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.



Leave a comment