ENCOUNTER SOON: भागना नामुमकिन! सारंडा में घिरा देश का मोस्ट वांटेड माओवादी
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा जंगल में देश के सबसे बड़े एंटी-माओवाद ऑपरेशनों में से एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा और उसके 40–50 साथियों को सुरक्षा बलों ने लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में घेर लिया है.

Ranchi: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा जंगल में देश के सबसे बड़े एंटी-माओवाद ऑपरेशनों में से एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा और उसके 40–50 साथियों को सुरक्षा बलों ने लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में घेर लिया है. CRPF ने उसे एक महीने के भीतर सरेंडर करने का अल्टीमेटम दिया है. इसके साथ ही ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमाओं को सील कर दिया गया है, जबकि जंगल के भीतर रसद और हथियारों की सप्लाई लाइन भी पूरी तरह काट दी गई है. लगातार मुठभेड़, IED ब्लास्ट और कैंप-टू-कैंप कॉम्बिंग के बीच यह ऑपरेशन अब अंतिम चरण में माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब मिसिर बेसरा के पास या तो आत्मसमर्पण का रास्ता है या निर्णायक कार्रवाई का सामना करना होगा.
CRPF का 1 महीने का अल्टीमेटम
CRPF के स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने सारंडा के बालीबा कैंप के दौरे के दौरान स्पष्ट कहा है कि मिसिर बेसरा और उसके दस्ते को अधिकतम एक महीने का समय दिया जा रहा है. इस अवधि में सरेंडर नहीं होने पर “फाइनल और निर्णायक कार्रवाई” की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक यह ऑपरेशन अब सामान्य कॉम्बिंग से आगे बढ़कर टारगेटेड हंट फेज में पहुंच चुका है.
10 किलोमीटर का घेरा, रास्ते पूरी तरह सील
सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा को बाबूडेरा, कुमडीह और बालीबा के घने जंगलों में लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में सीमित कर दिया है. CRPF, CoBRA, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीमों ने हर संभावित रास्ते पर कैंप बना दिए हैं. ओडिशा के कोइडा-बोलानी और छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले मार्गों को भी बंद कर दिया गया है. अधिकारियों का दावा है कि अब जंगल से निकलकर भागना लगभग असंभव हो चुका है.
भूख और मुठभेड़ का दोहरा दबाव
मिसिर बेसरा और उसके साथियों तक अब न राशन पहुंच पा रहा है और न ही हथियार. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसके साथी आसपास के गांवों से गुपचुप अनाज मांगने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच जंगल में रुक-रुक कर फायरिंग जारी है. हाल के दिनों में IED ब्लास्ट में कई जवान घायल भी हुए हैं, जिससे साफ है कि माओवादी अब रक्षात्मक मोड में लड़ाई लड़ रहे हैं.
बेटे की अपील
मामले में भावनात्मक एंगल तब जुड़ा जब मिसिर बेसरा के बेटे सिद्धार्थ बेसरा ने अपने पिता से सरेंडर की अपील की. परिवार की ओर से लगातार पत्र और संदेश भेजे जाने की बात सामने आई है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सारंडा का यह ऑपरेशन देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अंतिम बड़े अभियानों में से एक साबित हो सकता है. अब सबकी नजर अगले कुछ दिनों पर है—क्या मिसिर बेसरा हथियार डालेगा या यह मुठभेड़ उसके अध्याय का अंतिम अंत बनेगी.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.






Leave a comment