IAS आशीष मोदी के OBC सर्टिफिकेट पर क्यों उठे सवाल? केंद्र ने झारखंड से मांगी रिपोर्ट
राजस्थान के सीकर जिले के कलेक्टर और 2014 बैच के IAS अधिकारी आशीष मोदी के OBC प्रमाणपत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच चुका है. केंद्र ने इस संबंध में झारखंड सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है


राजस्थान के सीकर जिले के कलेक्टर और 2014 बैच के IAS अधिकारी आशीष मोदी के OBC प्रमाणपत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच चुका है. केंद्र ने इस संबंध में झारखंड सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है और झारखंड की ओर से मामले को गिरिडीह जिला प्रशासन के पास भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. आशीष मोदी राजस्थान कैडर के 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं. उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 350 हासिल की थी. उनका डोमिसाइल राज्य झारखंड बताया जाता है.
फतेहपुर से गिरिडीह आया परिवार
बताया जा रहा है कि आशीष मोदी का परिवार मूल रूप से राजस्थान के फतेहपुर क्षेत्र से जुड़ा रहा है. बाद में परिवार झारखंड के गिरिडीह में आकर बस गया. यहीं से उनके परिवार का झारखंड से संबंध बना. अब विवाद उनके OBC प्रमाणपत्र को लेकर है. केंद्र सरकार ने प्रमाणपत्र से जुड़े तथ्यों और उनकी पात्रता की जांच के लिए झारखंड से रिपोर्ट मांगी है. इसके बाद झारखंड सरकार ने मामला गिरिडीह जिला प्रशासन को भेज दिया है.
आखिर विवाद किस बात पर है?
मामले में मुख्य सवाल यह है कि IAS अधिकारी के रूप में UPSC चयन के समय प्रस्तुत किया गया OBC प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुआ था और उसके लिए जरूरी दस्तावेज तथा पात्रता क्या थी. झारखंड में मोदी समुदाय को OBC श्रेणी में शामिल किए जाने का दावा किया गया है. लेकिन किसी व्यक्ति के OBC प्रमाणपत्र की वैधता केवल जाति के नाम से तय नहीं होती. प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया, संबंधित रिकॉर्ड, निवास और लागू नियमों समेत सभी तथ्यों की जांच जरूरी होती है.
आशीष मोदी का क्या कहना है?
विवाद के बीच आशीष मोदी की ओर से अपने प्रमाणपत्र को सही बताया गया है. उनका दावा है कि प्रमाणपत्र में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है. अब गेंद झारखंड के गिरिडीह जिला प्रशासन के पाले में है. जिला स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जा सकती है, जिसके आधार पर केंद्र को जवाब दिया जाएगा.
अब आगे क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है. क्या प्रमाणपत्र नियमों के मुताबिक जारी हुआ था? क्या UPSC में OBC श्रेणी का लाभ लेने के लिए उस समय सभी जरूरी शर्तें पूरी थीं? और अगर प्रमाणपत्र में कोई विसंगति सामने आती है, तो उसका IAS अधिकारी की सेवा पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही साफ होंगे.
इसलिए अभी इसे “OBC सर्टिफिकेट फर्जी” कहना सही नहीं होगा. मामला जांच के स्तर पर है और अधिकारी खुद प्रमाणपत्र को वैध बता रहे हैं. अब सबकी नजर गिरिडीह प्रशासन की रिपोर्ट और उसके बाद केंद्र सरकार की कार्रवाई पर है.

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