माइंस एंड मिनरल्स एक्ट पर झारखंड में सियासी संग्राम, JMM की बड़ी बैठक में आंदोलन की रणनीति पर मंथन
झारखंड में माइंस एंड मिनरल्स एक्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है. JMM की बड़ी बैठक में हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और बसंत सोरेन समेत मंत्री-विधायक शामिल हुए. चक्काजाम समेत आंदोलन की रणनीति पर मंथन हुआ.

Ranchi: झारखंड में माइंस एंड मिनरल्स एक्ट को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है. केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गुरुवार को रांची में बड़ी बैठक बुलाई है. बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, मंत्री बसंत सोरेन समेत पार्टी कोटे के मंत्री, विधायक और प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए हैं. बैठक में केंद्र के फैसले के खिलाफ पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा हो रही है. सूत्रों के मुताबिक JMM राज्यभर में आंदोलन को धार देने की तैयारी कर रहा है. विरोध प्रदर्शन के साथ चक्काजाम जैसे कार्यक्रम आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है. पार्टी का मानना है कि खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों और राजस्व पर असर डालने वाला कोई भी फैसला झारखंड के हितों को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में बैठक को आने वाले दिनों में सरकार और संगठन की रणनीति तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
हेमंत सोरेन समेत पार्टी के बड़े नेता बैठक में मौजूद
JMM की इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा कल्पना सोरेन, बसंत सोरेन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद हैं. पार्टी के मंत्री, विधायक और पदाधिकारियों की मौजूदगी से साफ है कि मुद्दे को केवल विधानसभा या सरकार के स्तर तक सीमित रखने के बजाय संगठन के स्तर पर भी आंदोलन खड़ा करने की तैयारी है. बैठक में केंद्र के फैसले के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव पर चर्चा होने की संभावना है. पार्टी नेताओं के बीच इस बात पर मंथन हो रहा है कि झारखंड के खनिज संसाधनों और उनसे मिलने वाले राजस्व पर राज्य के अधिकारों को किस तरह मजबूती से सामने रखा जाए. JMM नेताओं का कहना है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की बड़ी भूमिका है. इसलिए खनिज नीति से जुड़े किसी भी बदलाव का सीधा असर राज्य के राजस्व और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है.
चक्काजाम समेत बड़े आंदोलन की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक बैठक में केंद्र के फैसले के खिलाफ आंदोलन को व्यापक रूप देने पर चर्चा हो रही है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन के साथ चक्काजाम जैसे कार्यक्रमों के विकल्प पर भी मंथन किया जा रहा है. पार्टी की रणनीति में सरकार के साथ-साथ संगठन के स्तर पर भी विरोध को मजबूत करने की योजना शामिल हो सकती है. JMM इस मुद्दे को झारखंड के अधिकार और खनिज संसाधनों से जुड़े हितों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है. अगर पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन का फैसला लेती है तो आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और तेज हो सकता है. फिलहाल रांची में चल रही बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यहीं से आंदोलन की अगली दिशा और कार्यक्रमों को लेकर बड़ा फैसला सामने आने की उम्मीद है.




