सारंडा में कमजोर पड़ा नक्सली नेटवर्क, 25 उग्रवादी करेंगे आत्मसमर्पण
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है. कोल्हान के सारंडा जंगल स्थित मंकी फॉरेस्ट क्षेत्र में सक्रिय मिसिर बेसरा दस्ते के 25 नक्सली आज रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे.

Ranchi: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है. कोल्हान के सारंडा जंगल स्थित मंकी फॉरेस्ट क्षेत्र में सक्रिय मिसिर बेसरा दस्ते के 25 नक्सली आज रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे. लंबे समय से सुरक्षा बलों के दबाव और लगातार चल रहे अभियान के कारण माओवादी संगठन कमजोर पड़ता नजर आ रहा है. आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े इनामी नक्सली, जोनल कमांडर, सब-जोनल कमांडर और एरिया कमांडर शामिल हैं. इस सरेंडर को राज्य में नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान सभी नक्सली हथियार डालेंगे और सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे सारंडा और आसपास के इलाकों में नक्सली गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा और संगठन की पकड़ और कमजोर होगी.
बड़े इनामी नक्सलियों का सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वालों में 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमिटी सदस्य चंदन लोहरा सबसे बड़ा नाम है. इसके अलावा पांच लाख का इनामी जयकांत उर्फ गूंगा और दो लाख का इनामी झारखंड-बिहार प्रवक्ता अश्विन उर्फ आजाद भी हथियार डालेंगे. मिसिर बेसरा का अंगरक्षक संनत उर्फ इतवारी मांझी के भी सरेंडर करने की सूचना है. सरेंडर करने वालों में तीन जोनल कमांडर, छह सब-जोनल कमांडर और छह एरिया कमांडर शामिल हैं. इनमें सागेन अंगरिया, प्रभात उर्फ नागेंद्र मुंडा, गुलशन मुंडा, रेखा मुंडा उर्फ जयंती, सुलेमान हांसदा और दर्शन उर्फ विजय हांसदा जैसे नाम प्रमुख हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह आत्मसमर्पण संगठन की कमजोर होती स्थिति को दर्शाता है.
हथियार और कारतूस भी होंगे जमा
सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली करीब डेढ़ दर्जन आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में कारतूस भी सुरक्षा एजेंसियों को सौंपेंगे. इनमें एलएमजी, इंसास राइफल और एसएलआर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं. सरकार की नीति के तहत सभी को चेक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन शुरू कर सकें.
मिसिर बेसरा नेटवर्क को बड़ा नुकसान
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह सरेंडर माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और सेंट्रल कमेटी मेंबर असीम मंडल के नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है. हालांकि शीर्ष नेतृत्व समेत करीब 20 नक्सली अब भी जंगलों में सक्रिय बताए जा रहे हैं. सुरक्षा बल लगातार उनकी तलाश और घेराबंदी अभियान चला रहे हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों के दबाव के कारण नक्सली अब छोटे-छोटे समूहों में बंटकर काम कर रहे हैं. वे जंगलों में हथियार छिपाकर ग्रामीण इलाकों में सादे वेश में रहने की कोशिश कर रहे हैं. इसे देखते हुए संवेदनशील गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है.

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