जब नटवर सिंह की पुस्तक ने उठा दिया था राजनीतिक तूफान, कभी गांधी परिवार के थे सबसे करीबी, संबंध बिगड़े तो मरते दम तक नहीं की बात
कांग्रेस में उनकी पकड़ कितनी मजबूत थी इसका पता इससे चलता है कि वह नेहरू के साथ नाश्ता किया करते थे. 1967 में राजीव गांधी और सोनिया की होने वाली शादी की खबर इंदिरा गांधी ने सबसे पहले जिन लोगों को बताई थी, उसमें नटवर भी थे.


रांची:
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का शनिवार रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. 93 वर्षीय नटवर सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली. नटवर सिंह की निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक पसरा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नटवर सिंह के निधन पर दुख जताया है. नटवर सिंह एक समय कांग्रेस के कद्दवर नेताओं में शामिल रहे थे, जिनकी गांधी परिवार तक सीधी पहुंच थी और जो जब चाहे तब मिल सकते थे, लेकिन जब दूरियां बढ़ी और संबंध बिगड़े तो बोल-चाल तक बंद हो गई. 2014 में नटवर सिंह की आत्मकथा वन लाइफ इज नॉट इनएफ जारी हुई थी. इस किताब ने दिल्ली के राजनीतिक हलकों में हंगामा कर दिया. किताब इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के शासन के दौरान कई संवेदनशील घटनाक्रमों का खुलासा करती है. किताब में नटवर सिंह की ओर से वोल्कर रिपोर्ट और उनके इस्तीफेे से पहले की पृष्ठभूमि में हुए विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों का विवरण दिया. सोनियां गांधी ने भी पुस्तक पर प्रतिक्रिया दी और इसकी सामग्री पर आपत्ति जताई थी.
1984 में हुई राजनीति में इंट्री
1984 में इंदिरा गांधी ने विदेश सेवा के अधिकारी नटवर सिंह की राजनीति में इंट्री करवाई. कांग्रेस में उनकी पकड़ कितनी मजबूत थी इसका पता इससे चलता है कि वह नेहरू के साथ नाश्ता किया करते थे. 1967 में राजीव गांधी और सोनिया की होने वाली शादी की खबर इंदिरा गांधी ने सबसे पहले जिन लोगों को बताई थी, उसमें नटवर भी थे. कांग्रेस में नटवर की असली पारी नब्बे के दशक में शुरु हुई.
राहुल गांधी की मौत के बाद कांग्रेस को संभाला
राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया को साोनिया गांधी. बनाने का काम नटवर सिंह ने ही किया था. उनकी हिंदी सुधरवाने से लेकर, कांग्रेस में उठ रहे बगावत को खत्म करने का काम नटवर सिंह ने किया. यूपीए-1 की मनोहन सरकार में वह विदेश मंत्री बने. लेकिन 2005 में उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. 2005 में 'ऑयल फॉर फूड' घोटाले में उनका नाम आया और भारी विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को जमकर घेरा था.
पाकिस्तान,अमेरिका में रहे राजदूत
पाकिस्तान में राजदूत के रूप में काम करने वाले नटवर सिंह 1966 से 1971 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यालय से भी जुड़े हुए थे. नटवर सिंह ने अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में भी भारत के राजदूत का कार्यभार संभाला था. इसके बाद 2004-05 में UPA-I सरकार में नटवर सिंह ने बतौर विदेश मंत्री अपनी सेवाएं दी थीं.
राजस्थान के शाही परिवार में जन्म
नटवर सिंह का जन्म 16 मई 1931 को राजस्थान के भरतपुर जिले में शाही परिवार में हुआ था. मेयो कॉलेज, अजमेर और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करके वो भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हुए. बतौर राजनयिक उनका करियर काफी लंबा था. नटवर सिंह को राष्ट्र के प्रति सेवा के लिए 1984 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. उन्होंने विदेश मामलों सहित अन्य विषयों पर कई चर्चित किताबें भी लिखीं, जिनमें द लिगेसी ऑफ नेहरू : अ मेमोरियल ट्रिब्यूट' और 'माई चाइना डायरी 1956-88' शामिल हैं.

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