"5 दिन दीजिए, पूरी संपत्ति बता दूंगा" JPSC सदस्य जमाल अहमद का जवाब; बाबूलाल ने उठाए थे सवाल
JPSC सदस्य डॉ. जमाल अहमद और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बीच विवाद खुली चुनौती में बदल गया है. मरांडी ने ACB जांच और पदमुक्ति की मांग की है, जबकि जमाल अहमद ने पांच दिनों में अपनी पूरी संपत्ति सार्वजनिक करने का ऐलान किया है.

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को लेकर सियासत अब सीधे आमने-सामने की लड़ाई में बदल गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर JPSC सदस्य डॉ. जमाल अहमद को तत्काल पदमुक्त करने और उनकी कथित आय से अधिक संपत्ति की ACB जांच कराने की मांग की है. मरांडी ने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी है. दूसरी ओर जमाल अहमद ने सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पलटवार किया है. उन्होंने घोषणा की है कि अगले पांच दिनों के भीतर अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति, आय के स्रोत और निवेश का विवरण सार्वजनिक करेंगे. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं है और तथ्यों के बजाय राजनीतिक आरोपों से JPSC जैसी संस्था की साख को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
मरांडी का आरोप- JPSC की साख बचानी है तो ACB जांच और तत्काल पदमुक्ति जरूरी
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि JPSC जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है और उनके चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के सभी स्रोतों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से गहन जांच कराई जानी चाहिए. मरांडी ने पत्र में यह भी कहा कि जांच के दौरान किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, इसके लिए जमाल अहमद को तत्काल पदमुक्त किया जाना चाहिए. उन्होंने वर्ष 2008 की लेक्चरर नियुक्ति प्रक्रिया का भी उल्लेख करते हुए सरकार से पूरे मामले में पारदर्शी कार्रवाई की मांग की.
जमाल अहमद का पलटवार- पांच दिन दीजिए, पूरी संपत्ति जनता के सामने रख दूंगा
बाबूलाल मरांडी के आरोपों के जवाब में JPSC सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने लिखित बयान जारी कर सभी आरोपों को निराधार, असत्य और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया. उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर होने के कारण अब तक सार्वजनिक बयान देने से बच रहे थे, लेकिन लगातार भ्रम फैलाए जाने के कारण अब सच सामने रखना जरूरी हो गया है. उन्होंने ऐलान किया कि अगले पांच दिनों के भीतर अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों, आय के स्रोत और निवेश का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करेंगे. उनके मुताबिक यह सिर्फ व्यक्तिगत सफाई नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण होगा.
लेक्चरर भर्ती, परिवार और निजी लाभ के आरोपों पर भी दी सफाई
डॉ. जमाल अहमद ने अपने बयान में वर्ष 2008 के कथित लेक्चरर नियुक्ति विवाद का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह किसी भी मामले में न आरोपी हैं और न ही किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है. जिन लोगों के खिलाफ जांच एजेंसियों के पास साक्ष्य हैं, उनके नाम सार्वजनिक हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि JPSC सदस्य रहते हुए उनकी पत्नी भर्ती प्रक्रिया के इंटरव्यू में शामिल ही नहीं हुईं, जबकि उनके दोनों पुत्रों ने आज तक JPSC की किसी परीक्षा के लिए आवेदन तक नहीं किया. उन्होंने कहा कि उनके परिवार या रिश्तेदारों ने कभी उनके पद का अनुचित लाभ नहीं लिया.
JPSC विवाद में अब सरकार की अगली चाल पर नजर
JPSC को लेकर पहले से जारी विवाद के बीच बाबूलाल मरांडी के पत्र और जमाल अहमद की खुली चुनौती ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है. विपक्ष ACB जांच और कार्रवाई की मांग पर अड़ा है, जबकि जमाल अहमद अपनी संपत्ति सार्वजनिक कर आरोपों का जवाब देने की तैयारी में हैं. अब निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार पर टिकी हैं कि वह जांच की मांग पर क्या फैसला लेती है और JPSC विवाद का यह नया अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ता है.

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