JPSC जांच में CID का शिकंजा और कसा, TDPL के 3 कर्मचारी गिरफ्तार; 5 आरोपी पुलिस रिमांड पर
JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID ने TDPL के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले गिरफ्तार पांच आरोपियों से पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी है, जबकि SIT डिजिटल साक्ष्यों और परीक्षा प्रक्रिया की कड़ियां खंगाल रही है.

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार गहराती जा रही है. पहले आयोग के अधिकारियों और आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी CID ने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है. रांची पुलिस की मदद से शहर के दो होटलों में की गई कार्रवाई में हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को हिरासत में लिया गया. इससे पहले गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को अदालत की अनुमति के बाद पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसी का कहना है कि पूरे नेटवर्क, डिजिटल साक्ष्यों और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया को जोड़कर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
डिजिटल साक्ष्यों और परीक्षा संचालन की कड़ियां खंगाल रही CID
CID की ताजा कार्रवाई परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्स एजेंसी TDPL तक जांच के दायरे के विस्तार का संकेत मानी जा रही है. जांच एजेंसी ने रांची पुलिस के सहयोग से छापेमारी कर कंपनी के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया. इससे पहले इसी मामले में JPSC की तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, TDPL के निदेशक समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. सभी से पूछताछ के आधार पर डिजिटल रिकॉर्ड, सर्वर डेटा, परीक्षा प्रबंधन से जुड़े दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है. जांच का फोकस यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताओं में किस स्तर तक मिलीभगत रही और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी.
आम लोगों से भी मांगी सूचना
JPSC परीक्षा विवाद की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) अब कई स्तरों पर साक्ष्य जुटा रहा है. हाल के दिनों में CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते के आवास और अन्य स्थानों पर भी तलाशी अभियान चलाया है. एजेंसी ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास परीक्षा से जुड़ी कोई जानकारी, दस्तावेज या अन्य साक्ष्य हों तो वे निर्धारित मोबाइल नंबर और ईमेल के माध्यम से साझा करें. CID ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी.

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