Mumbai: महाराष्ट्र सरकार में एक नया अध्याय आज 31 जनवरी 2026 को लिखने वाला है. सुनेत्रा पवार आज शाम 5 बजे महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी, जिससे वह इस पद पर आने वाली पहली महिला नेता बनेंगी. यह राजनीतिक बदलाव राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के 28 जनवरी को हुए विमान दुर्घटना में निधन के बाद आया है, जिससे उनके खाली हुए पद को भरने के लिए यह निर्णय लिया गया है.
सुनेत्रा पवार, जो वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं, 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया. पार्टी के नेताओं ने कहा है कि सुनेत्रा पवार को NCP विधायक दल का नेता चुना जाएगा और उसके बाद वह उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी. शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन, मुंबई में होगा, जहां मंत्रिमंडल विस्तार और पद सौंपने के औपचारिक कार्य संपन्न होंगे.
यह नियुक्ति न केवल राजनीतिक स्थानांतरण का प्रतीक है बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक पल भी है, क्योंकि राज्य को अब पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिल रही है. इस परिवर्तन से पार्टी और सरकार के संतुलन तथा आगामी राजनीतिक योजनाओं पर भी असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
2 बजे विधायक दल की बैठक
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद की पुष्टि NCP विधायक दल की बैठक के बाद की जाएगी. बैठक दोपहर 2 बजे मुंबई के विधान भवन में आयोजित होगी, जहां से पार्टी विधायक उन्हें नेता के रूप में चुनेंगे. इसके बाद शाम 5 बजे उन्हें Lok Bhavan में शपथ दिलाई जाएगी. पार्टी सूत्रों के अनुसार, NCP के लगभग सभी विधायक इस बैठक में उपस्थित रहेंगे और बिना किसी विरोध के सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति से यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार और पार्टी सुनेत्रा पवार के निर्णय का समर्थन करेगी और NCP तथा गठबंधन के भाजपा के बीच सहयोग बना रहेगा. यह कदम सरकार की स्थिरता और आगामी चुनावी रणनीतियों दोनों के लिए अहम बताया जा रहा है.
बारामती सीट से लड़ सकती हैं उपचुनाव
सुनेत्रा पवार अभी तक किसी विधानसभा सदस्य के रूप में नहीं चुनी गई हैं; वे राज्यसभा सदस्य हैं. भारतीय संविधान के तहत, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनने के बाद 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य चुना जाना आवश्यक होगा. इसके लिए संभावित रूप से बारामती सीट पर उपचुनाव कराना पड़ेगा, जो अब रिक्त हो गई है क्योंकि अजित पवार के निधन के बाद वहां खाली पद रह गया है. इसके अलावा, सुनेत्रा पवार को मंत्रिपरिषद में विभिन्न विभागों का प्रभार सौंपा जा सकता है, जिसमें Excise और Sports जैसे मंत्रालयों का उल्लेख कुछ रिपोर्ट्स में किया गया है. हालांकि, वित्त और योजना विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री के पास रखे जाने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि मार्च में बजट सत्र निर्धारित है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिवारिक विरासत
सुनेत्रा पवार का नाम राजनीति में लंबे समय से जुड़ा है, लेकिन वे स्वयं चुनावी राजनीति में अपेक्षाकृत नई हैं. वे राज्यसभा सदस्य हैं और पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुकी हैं. उनके राजनीतिक जीवन में उनका परिवार एक बड़ा रोल निभाता रहा है, खासकर उनके late पति अजित पवार, जो NCP के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे. उनके पिता पद्मसिंह पाटिल भी पूर्व में राजनीति में सक्रिय रहे हैं, और पवार परिवार महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं. इस नियुक्ति से यह राजनीतिक विरासत और और मजबूत होती दिख रही है.
पार्टी और गठबंधन में प्रतिक्रिया
NCP नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम को स्वीकार करते हुए कहा है कि यह कदम पार्टी को एकता और नेतृत्व दोनों में मजबूती देगा. वरिष्ठ नेताओं जैसे प्रफुल पटेल, सुनील तत्कार और छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बैठक की और पार्टी के फैसले के बारे में उन्हें अवगत कराया. मुख्यमंत्री फडणवीस ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे NCP और पवार परिवार के फैसले का समर्थन करेंगे, और सरकार में सहयोग जारी रहेगा. यह बयान सत्ता गठबंधन की स्थिरता का संकेत देता है.
आगे की राजनीति और संभावित चुनौतियां
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई सवाल उठ रहे हैं. एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि वे विधायक नहीं हैं, इसलिए छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद में सीट जीतना अनिवार्य होगा. बारामती के उपचुनाव में उनका हिस्सा लेना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि यह सीट अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई है. इसके अलावा, पार्टी के भीतर और पवार परिवार के कुछ सदस्यों के बीच मतभेद के संकेत भी मीडिया में सामने आए हैं, जिससे यह राजनीतिक बदलाव चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है. हालांकि, फिलहाल सभी प्रमुख नेताओं ने सुनेत्रा पवार के निर्णय को समर्थन दिया है.


