New Delhi: दिल्ली में झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. झारखंड भवन में हुई इस बंद कमरे की बैठक को औपचारिक तौर पर संगठनात्मक समीक्षा और मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसके सियासी निहितार्थ इससे कहीं गहरे बताए जा रहे हैं. पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही असंतोष की चर्चाओं के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
कांग्रेस के अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि पार्टी का एक वर्ग मौजूदा मंत्रियों की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है और संगठन की उपेक्षा के आरोप भी लगाए जा रहे हैं. ऐसे में दिल्ली में शीर्ष नेताओं का एक साथ जुटना केवल रूटीन मीटिंग नहीं माना जा रहा. बैठक के बाद भले ही कोई आधिकारिक बयान नाराज़गी को लेकर सामने न आया हो, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ तौर पर मंथन और संभावित बदलावों की ओर इशारा कर रहे हैं.
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद
दिल्ली में आयोजित इस अहम बैठक में झारखंड कांग्रेस के कई दिग्गज चेहरे शामिल हुए. बैठक में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पार्टी प्रभारी बेला प्रसाद, विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल और युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रियाज अहमद मौजूद रहे. इन नेताओं की मौजूदगी ने बैठक के महत्व को और बढ़ा दिया. सूत्रों के अनुसार, संगठन की मौजूदा स्थिति, कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई. खास बात यह रही कि बैठक पूरी तरह बंद कमरे में हुई, जिससे इसके एजेंडे को लेकर अटकलें और तेज हो गईं.
संगठन मजबूत करने पर जोर, जमीनी सक्रियता पर मंथन
बैठक से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और नेताओं के सार्वजनिक संकेतों के मुताबिक, चर्चा का केंद्र संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर रहा. नेताओं ने माना कि कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक ढांचे को और सक्रिय करने की जरूरत है. बताया जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय कैसे स्थापित हो, इस पर भी गंभीर मंथन हुआ. पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि संगठन की आवाज सरकार तक ज्यादा प्रभावी ढंग से पहुंचे, ताकि कार्यकर्ताओं में संदेश जाए कि उनकी भूमिका सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है.
क्या मंत्रियों से नाराज़गी भी रही मुद्दा?
हालांकि बैठक के बाद किसी नेता ने मंत्रियों के खिलाफ असंतोष की खुलकर पुष्टि नहीं की, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है. सूत्रों का दावा है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा है कि कुछ मंत्री संगठन से दूरी बनाए हुए हैं. दिल्ली बैठक को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है. फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व ने मतभेदों की बात से इनकार किया है, लेकिन इतना साफ है कि झारखंड कांग्रेस के भीतर संगठन और सरकार को लेकर मंथन का दौर तेज हो चुका है.


