जमशेदपुर के युवा कारोबारी कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. करीब सत्रह दिन बाद पुलिस ने पूरे अपहरण नेटवर्क का खुलासा करते हुए बिहार और झारखंड से जुड़े एक संगठित गिरोह को बेनकाब किया है. इस कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि हथियार बरामदगी के दौरान हुई मुठभेड़ में तीन अपराधी गोली लगने से घायल हो गए. पुलिस जांच में सामने आया है कि अपहरण की साजिश राज्य से बाहर बैठकर रची गई थी और वारदात को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने पुलिस स्टीकर लगी गाड़ी का इस्तेमाल किया, ताकि किसी को शक न हो. मामले की गंभीरता को देखते हुए कई विशेष टीमों का गठन किया गया था. लगातार दबाव और तकनीकी जांच के चलते पुलिस आखिरकार पूरे गिरोह तक पहुंचने में सफल रही.
हथियार बरामदगी के दौरान फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में अपराधी ढेर होने से बचे
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले. तीन आरोपियों ने बताया कि अपहरण में इस्तेमाल किए गए हथियार और गोलियां शहर के एक इलाके में छिपाकर रखी गई हैं. पुलिस टीम जब उन्हें बरामदगी के लिए लेकर गई, तभी आरोपियों ने मौके का फायदा उठाते हुए एक पुलिसकर्मी से सरकारी हथियार छीन लिया और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. स्थिति को देखते हुए पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीन अपराधियों के पैर में गोली लगी. घायल आरोपियों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने छीना गया हथियार सुरक्षित बरामद कर लिया है और मौके से देशी कट्टे व गोलियां भी जब्त की गई हैं.
दबाव बढ़ा तो कारोबारी को छोड़कर भागे अपराधी
पुलिस के अनुसार, 13 जनवरी को कारोबारी कैरव गांधी का अपहरण किया गया था. अपराधी उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे. जैसे-जैसे जांच तेज हुई और संभावित रास्तों पर घेराबंदी बढ़ी, गिरोह पर दबाव बनता गया. पुलिस की सक्रियता से घबराकर अपहरणकर्ता जीटी रोड के पास कैरव गांधी को छोड़कर फरार हो गए. बाद में पुलिस ने उन्हें सकुशल बरामद कर परिजनों तक पहुंचाया. जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह से जुड़े कई अन्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस का दावा है कि पूरे नेटवर्क को जल्द ही पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा.

