पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में बिहार सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की सिफारिश की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए. राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष और विस्तृत जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. छात्रा की मौत के बाद से यह मामला लगातार विवादों में रहा है. परिजनों ने शुरू से ही आत्महत्या की थ्योरी को खारिज करते हुए दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया था. पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. अब सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद यह मामला राज्य पुलिस के दायरे से बाहर जाता दिख रहा है. आगे की कार्रवाई केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगी.
पुलिस जांच पर उठे सवाल, मामला हाई-प्रोफाइल बना
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या से जोड़कर देखा था. हालांकि, छात्रा की हालत और बाद में सामने आई मेडिकल रिपोर्ट ने इस निष्कर्ष पर सवाल खड़े कर दिए. छात्रा को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई. उन्होंने पुलिस पर सबूतों को नजरअंदाज करने और मामले को दबाने का आरोप भी लगाया. पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में दुष्कर्म से जुड़े संकेत सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया. इसके बाद पुलिस ने कुछ संदिग्धों के सैंपल लेकर फोरेंसिक जांच कराई, लेकिन जांच की दिशा और गति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे.
परिवार के आरोप और पुलिस कार्रवाई के बीच टकराव
छात्रा के परिजन शुरू से ही पुलिस जांच से असंतुष्ट रहे हैं. उनका कहना है कि घटना के शुरुआती घंटों में सही तरीके से साक्ष्य सुरक्षित नहीं किए गए, जिससे जांच प्रभावित हुई. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल प्रशासन और कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका की गंभीरता से जांच नहीं की गई. परिवार की ओर से यह मामला लगातार उठाए जाने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ा. परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया और चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे. इसी बीच मामला मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया, जिससे सरकार पर निर्णय लेने का दबाव और तेज हो गया.
राज्य सरकार का फैसला: CBI से होगी जांच
लगातार बढ़ते दबाव और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार सरकार ने अब CBI जांच की सिफारिश की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच चाहती है. राज्य के गृह विभाग की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि पुलिस जांच के दौरान उठे सभी सवालों का जवाब अब केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से तलाशा जाएगा. सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस मामले को राज्य पुलिस के स्तर पर सीमित नहीं रखना चाहती. हालांकि, CBI जांच शुरू होने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी.
विपक्ष का हमला, सरकार पर लगाए सवाल
CBI जांच की सिफारिश के बावजूद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. विपक्ष का कहना है कि यदि शुरू से ही सही और गंभीर जांच होती, तो मामला इस स्तर तक नहीं पहुंचता. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दबाव बढ़ने के बाद ही CBI जांच का फैसला लिया. विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस की शुरुआती जांच में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है. इस मामले को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक सियासी बयानबाजी तेज हो गई है.
आगे क्या: CBI जांच से क्या बदलेगा
यदि केंद्र सरकार CBI जांच को मंजूरी देती है, तो एजेंसी नए सिरे से पूरे मामले की जांच करेगी. इसमें फोरेंसिक रिपोर्ट का दोबारा विश्लेषण, गवाहों से पुनः पूछताछ और पुलिस जांच की समीक्षा शामिल हो सकती है. CBI यह भी जांच कर सकती है कि शुरुआती जांच में कोई लापरवाही या साक्ष्य से छेड़छाड़ तो नहीं हुई. अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार कब तक CBI जांच को हरी झंडी देती है और जांच एजेंसी इस हाई-प्रोफाइल मामले को किस दिशा में ले जाती है. फिलहाल, छात्रा के परिवार को उम्मीद है कि CBI जांच से उन्हें न्याय मिलेगा.

