31 जनवरी 2026 को सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट का दौर जारी रहा है, जिससे सर्राफा बाजार और निवेशकों दोनों में हलचल बढ़ गई है. शुक्रवार को 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की दरों में गिरावट दर्ज की गई और चांदी के दाम भी पिछले उच्च स्तरों से काफी नीचे आ गए. घरेलू बाजार में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक संकेतकों के साथ साथ MCX वायदा भाव की कमजोरी के कारण आया है, जिससे खरीदारों तथा निवेशकों को ताज़ा भावों के हिसाब से अपनी खरीद-फरोख्त रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है. सोने की दरों में गिरावट ने कुछ शहरों में 24 कैरेट गोल्ड को ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब ला दिया है. वहीं, चांदी के भाव– जो जनवरी में कई बार उच्च स्तरों पर पहुंच चुके थे – अब ₹3.90 लाख से ₹4.05 लाख प्रति किलोग्राम के बीच कारोबार कर रहे हैं. इस बदलाव से ज्वेलरी बाजार तथा निवेशक दोनों प्रभावित हुए हैं, और विशेषज्ञ भी मौजूदा रुझानों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं.
रिकॉर्ड गिरावट: सोना और चांदी के दामों का हाल
सोने और चांदी दोनों की कीमतों में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को नुकसान झेलना पड़ा. एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में गिरावट के साथ ही चांदी के भाव भी अपने ऑल-टाइम उच्च स्तर से काफी नीचे उतर गए हैं. विशेष रूप से चांदी ने ऑल-टाइम हाई से लगभग ₹1.28 लाख तक गिरावट दर्ज की है, जबकि सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से ₹40,000 से अधिक ढली है. सोने-चांदी की इस गिरावट ने सर्राफा बाजार में शुक्रवार को भारी असर दिखाया. कई बाजारों में सोने का भाव 24 कैरेट के लिए लगभग ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा, जबकि चांदी औसतन ₹3.90-₹4.05 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी. यह गिरावट उन निवेशकों के लिए अप्रत्याशित थी जिन्होंने उच्च भावों पर सोना-चांदी खरीदा था.
शहरों में सोने-चांदी के ताजा भाव
31 जनवरी को शहर-वार सोने के भाव में काफी भिन्नता देखी गई, लेकिन अधिकांश शहरों में कीमतों में गिरावट बनी रही. दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे बाजारों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹16.9 हजार प्रति ग्राम के पास कारोबार कर रहा था. 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव भी क्रमशः लगभग ₹15.5 हजार और ₹12.7 हजार प्रति ग्राम के स्तर पर थे. चांदी के बाजार में भी गिरावट की लहर जारी रही. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में चांदी लगभग ₹3.94-3.95 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी, जबकि चेन्नई-हैदराबाद जैसे बाजारों में भाव ₹4.04-₹4.05 लाख के आसपास दर्ज किए गए. इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्थानीय बाजारों में भी सोना-चांदी का कारोबार गिरते रुझानों को प्रतिबिंबित कर रहा है.
गिरावट के पीछे के आर्थिक कारण
विश्लेषकों के अनुसार, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट केवल घरेलू बाजार की घटना नहीं है; यह वैश्विक स्तर पर भी दर्ज की जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत बने रहने, बॉन्ड यील्ड्स में उतार-चढ़ाव और मुनाफावसूली की वजह से धातुओं के भाव में दबाव आया है. ऐसे में कई निवेशकों ने अपनी पोजीशन को निष्क्रिय किया, जिससे कीमतों में और गिरावट आई. ग्लोबल मार्केट संकेत भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यूरोपीय और अमेरिकी वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीतियों की दिशा ने सोने-चांदी के भावों को प्रभावित किया. डॉलर की मजबूती से धातुओं की अपेक्षाकृत कीमत बढ़ गई, जिससे खनिज बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ा.
निवेशकों और खरीदारों के लिए वर्तमान परिदृश्य
सोना-चांदी की कीमतों में आई गिरावट का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर साफ दिख रहा है. कुछ निवेशकों ने यह गिरावट मुनाफावसूली का मौका मानते हुए धातुओं को बेचना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ ने गिरावट को खरीद का अवसर बताया है. हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को संभावित जोखिमों और बाजार की दिशा को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए. ज्वेलरी खरीदारों के लिए यह समय मिश्रित संकेत दे रहा है. जहां एक तरफ गिरती कीमतें खरीद को आकर्षक बना रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार की अनिश्चितता और भावों में तेजी से उतार-चढ़ाव जोखिम के संकेत दिखा रहे हैं. खरीदारों को शहर-वार ताजा दरों की पुष्टि करना आवश्यक है, क्योंकि स्थानीय बाजार भाव अलग-अलग हो सकते हैं.
आगे का बाजार रुख और संभावित दिशा
सोना-चांदी की कीमतों की आगे की दिशा पर कई कारक प्रभाव डालेंगे. अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनिश्चित बनी रहती हैं और डॉलर मजबूत रहता है, तो धातुओं के भाव में और गिरावट देखने को मिल सकती है. इसके विपरीत, अगर वित्तीय बाजारों में स्थिरता आती है, तो कीमतों में दोबारा समर्थन मिल सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेशकों को नीतिगत फैसलों, केंद्रीय बैंकों की घोषणाओं और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए. इनमें मुद्रास्फीति के आंकड़े, केंद्रीय बैंकों की बैठकें, और अंतरराष्ट्रीय मांग-आपूर्ति संतुलन शामिल हैं. इन संकेतों के आधार पर सोना-चांदी का रुख बदल सकता है, जिससे बाजार में मूल्य प्रवृत्तियों को कैसे प्रभावित किया जाएगा, यह स्पष्ट होगा.

