नामकुम जमीन घोटाला: ACB की जांच तेज, पूर्व CO समेत कई अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में
रांची के नामकुम जमीन घोटाले में ACB ने जांच तेज कर दी है. झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पूर्व अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा समेत कई अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है. मामला जमीन रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और दोहरी जमाबंदी से जुड़ा है, जिसमें कई अहम खुलासे होने की संभावना है.

रांची: राजधानी रांची के नामकुम अंचल से जुड़े चर्चित जमीन घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है. झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मामले में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) दर्ज कर ली है. जांच का दायरा सिर्फ तत्कालीन अंचलाधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अंचल कार्यालय में तैनात रहे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है. आरोप है कि सरकारी भूमि अभिलेखों में कथित हेरफेर कर एक ही जमीन पर दूसरी जमाबंदी कायम की गई, जिससे करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन विवादों में घिर गई. ACB अब दस्तावेजों की जांच, राजस्व रिकॉर्ड का मिलान और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है. माना जा रहा है कि इस मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद ACB ने दर्ज की प्रारंभिक जांच
झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ACB ने मामले में प्रारंभिक जांच दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है. जांच में तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार समेत अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी. जांच एजेंसी ने सरकार से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है.
पुराने रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका भी होगी जांच का हिस्सा
ACB केवल हालिया घटनाक्रम तक सीमित नहीं रहेगी. एजेंसी वर्ष 2012-13 से 2014-15 के दौरान नामकुम अंचल में पदस्थापित रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल की भी समीक्षा करेगी. राजस्व अभिलेखों, फाइलों और प्रशासनिक आदेशों की जांच के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि रिकॉर्ड में कथित बदलाव कब और किन परिस्थितियों में हुए.
डुंडू गांव की जमीन बना विवाद का केंद्र
पूरा मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित करीब 1.22 एकड़ जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है. संबंधित भूमि खाता संख्या 32 तथा प्लॉट संख्या 776, 820, 821 और 822 में दर्ज है. इसी जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर विवाद सामने आया, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और जांच एजेंसियों को हस्तक्षेप करना पड़ा.
दूसरी जमाबंदी खोलने के आरोप से बढ़ा विवाद
शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी मां ने पंजीकृत बिक्री विलेखों के माध्यम से जमीन खरीदी थी और परिवार वर्षों से उस पर खेती करता रहा. बाद में उन्हें अंचल कार्यालय से नोटिस मिला, जिसमें दोहरी जमाबंदी का उल्लेख था. जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि उसी भूमि के एक हिस्से पर किसी अन्य संस्था के नाम नई जमाबंदी दर्ज कर दी गई थी. अब ACB यह पता लगाएगी कि यह प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई.
दस्तावेजों की जांच के बाद आगे बढ़ेगी कार्रवाई
जांच एजेंसी अब राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी फाइलों और संबंधित दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण करेगी. साथ ही, उस समय पदस्थापित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा सकती है. यदि जांच में दस्तावेजों में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो आगे विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी. इस मामले की जांच को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजरें भी ACB की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

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