करम मनाने से आदिवासी होने का दावा नहीं! कुड़मी ST मांग पर चमरा लिंडा ने रखी बात
“करम पर्व को लेकर मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि इसका संबंध प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के संतुलन से है. वहीं कुड़मी समाज की ST मांग पर उन्होंने करम पर्व मनाने को अलग विषय बताया. उन्होंने कहा कि कई अन्य समुदाय भी करम पर्व मनाते हैं.”

Ranchi: झारखंड में करम पर्व को लेकर मंत्री चमरा लिंडा ने प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच इसके संबंध को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि करम पर्व का महत्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी परंपराएं प्रकृति के संतुलन से जुड़ी हुई हैं. करम देव के वृक्ष, जावा फूल और करम-धरम की कहानियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे नैतिकता और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व बताया. इसी दौरान कुड़मी समाज की ओर से करम पर्व मनाने और ST दर्जे की मांग के बीच संबंध को लेकर भी सवाल किया गया, जिस पर उन्होंने इसे अलग-अलग विषय बताया.
करम पर्व की परंपराओं में प्रकृति और नैतिकता का संदेश
चमरा लिंडा ने कहा कि करम पर्व की कई परंपराएं सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़ी हुई हैं. उनके अनुसार, करम देव का वृक्ष ऑक्सीजन और पर्यावरण से जुड़ा महत्व रखता है, जबकि जावा फूल और अन्य कर्मकांड भी प्रकृति के साथ संबंध को दर्शाते हैं. उन्होंने करम-धरम की कहानियों का जिक्र करते हुए कहा कि इनके जरिए इंसान को नैतिकता का संदेश दिया जाता है. भाई-बहन के उपवास और पूजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि करम देव से दुख, तकलीफ और बीमारी को दूर करने की प्रार्थना की जाती है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन से कई तरह की परेशानियां और प्रकोप आते हैं. ऐसे में करम पर्व के जरिए प्रकृति के संतुलन और सुख-शांति की कामना की जाती है. उन्होंने झारखंडवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं भी दीं.
करम मनाने और ST दर्जे की मांग को अलग विषय बताया
कुड़मी समाज द्वारा करम पर्व मनाए जाने और ST दर्जे की मांग को लेकर सवाल किए जाने पर चमरा लिंडा ने कहा कि करम पर्व केवल आदिवासी समाज तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि कुड़मी के अलावा कई अन्य समुदाय भी करम पर्व मनाते हैं. उनके मुताबिक , प्रजापति और झारखंड के अन्य मूलवासी समुदायों में भी करम पर्व मनाने की परंपरा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी पर्व को मनाने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित समुदाय आदिवासी होने का दावा कर रहा है. उन्होंने करम पर्व और ST दर्जे की मांग को दो अलग-अलग विषय बताया. उनके अनुसार, यदि करम पर्व मनाने को ही ST दर्जे की मांग का आधार माना जाए, तो ऐसे कई समुदाय हैं जो यह पर्व मनाते हैं. इसलिए केवल करम पर्व मनाने के आधार पर किसी समुदाय के आदिवासी दर्जे के सवाल को जोड़ना उचित नहीं होगा.



