JPSC विवाद पर गरमाई सियासत, आदित्य साहू बोले- तीनों सदस्यों को हटाए सरकार
JPSC विवाद को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने हेमंत सरकार से तीनों सदस्यों की बर्खास्तगी, एफआईआर और CBI जांच की मांग की. भर्ती घोटालों पर सरकार को घेरा.

Ranchi: झारखंड में JPSC से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने गुरुवार को राज्य सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल तत्कालीन अध्यक्ष के इस्तीफे से मामले का समाधान नहीं होगा, क्योंकि आयोग के तीनों सदस्य अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। साहू ने आरोप लगाया कि जब तक इन सदस्यों को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से तीनों सदस्यों को तत्काल बर्खास्त करने, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि भर्ती घोटालों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना युवाओं के हित में जरूरी है।
'तीनों सदस्य पद पर रहेंगे तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी'
आदित्य साहू ने कहा कि JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते के इस्तीफे के बाद भी आयोग के तीनों सदस्य अपने पद पर बने हुए हैं। उनके मुताबिक, ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना उचित नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि तीनों सदस्यों को तत्काल पद से हटाया जाए, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो और उन्हें गिरफ्तार कर कानून के दायरे में लाया जाए। साथ ही उन्होंने पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई में तेजी लाने की मांग की।
'भर्ती घोटालों की लीपापोती कर रही सरकार'
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भर्ती परीक्षाओं में सामने आए विवादों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि JPSC, JSSC और उत्पाद सिपाही भर्ती से जुड़े मामलों में छात्रों और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए सरकार की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। साहू के अनुसार, सरकार को पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।
CBI जांच की मांग दोहराई, संसद में भी उठाया मुद्दा
साहू ने कहा कि भर्ती घोटालों की निष्पक्ष जांच केवल CBI ही कर सकती है। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों को लेकर बीजेपी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर विरोध दर्ज कराया और अब संसद परिसर में मौन उपवास भी किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के अधिकारों के मुद्दे पर लगातार आवाज उठाती रहेगी।
'युवाओं के हित में सरकार ठोस कदम उठाए'
आदित्य साहू ने कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में छात्रों और युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, तीनों सदस्यों को बर्खास्त किया जाए और पूरे मामले की CBI जांच की सिफारिश की जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल आंतरिक जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी और निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी की जरूरत है।

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