परिसीमन पर आमने-सामने दो आदिवासी नेता, समीर उरांव के आरोपों पर बंधु तिर्की का पलटवार
“ झारखंड में परिसीमन को लेकर सियासत गर्म है. आदिवासी एकता महाजुटान के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है”

रांची: झारखंड में परिसीमन को लेकर सियासत गर्म है. आदिवासी एकता महाजुटान के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. अब इस सियासी बहस के केंद्र में दो आदिवासी नेता आमने-सामने हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कांग्रेस नेता बंधु तिर्की पर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो बंधु तिर्की ने भी पलटवार करते हुए समीर उरांव को निशाने पर लिया है.
समीर उरांव ने बंधु तिर्की पर जमीन दलाली का आरोप लगाया था. इसके साथ ही उन्होंने सरना और सनातन को लेकर भी बड़ा बयान दिया. समीर उरांव ने कहा कि “सरना और सनातन पूरी तरह से एक हैं और एक रहेंगे.” उनके इस बयान के बाद अब कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने जवाब दिया है.
बंधु तिर्की का पलटवार- पहले अपने गिरेबान में झांकें
समीर उरांव के आरोपों पर बंधु तिर्की ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि बंधु तिर्की पर उंगली उठाने वालों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.
बंधु तिर्की ने समीर उरांव के बयान में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने समीर उरांव के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए उनके बयान और राजनीतिक भाषा पर सवाल खड़े किए.
बंधु तिर्की का कहना है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले आरोप लगाने वाले को अपने आचरण और राजनीतिक भूमिका पर भी नजर डालनी चाहिए. इस तरह दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंचती दिख रही है.
परिसीमन बना सियासत का केंद्र
दरअसल, झारखंड में परिसीमन को लेकर आदिवासी संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच बहस लगातार तेज हो रही है. आदिवासी एकता महाजुटान में भी परिसीमन के साथ आदिवासी अधिकार, पहचान, विस्थापन, PESA और जल-जंगल-जमीन जैसे मुद्दे उठाए गए थे.
आदिवासी नेताओं और संगठनों की चिंता यह है कि परिसीमन की प्रक्रिया का असर झारखंड की आदिवासी आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है. यही वजह है कि परिसीमन का मुद्दा अब सिर्फ चुनावी सीटों की संख्या या सीमाओं के बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है. इसके साथ आदिवासी पहचान और राजनीतिक हिस्सेदारी का सवाल भी जुड़ गया है.
सरना और सनातन पर भी आमने-सामने
परिसीमन के बीच सरना और सनातन को लेकर समीर उरांव का बयान भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. समीर उरांव ने दोनों को एक बताते हुए कहा कि “सरना और सनातन पूरी तरह से एक हैं और एक रहेंगे.”
वहीं, आदिवासी पहचान और सरना धर्म से जुड़े मुद्दों पर झारखंड में लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक मत सामने आते रहे हैं. ऐसे में समीर उरांव के बयान के बाद यह बहस और तेज हो सकती है.
बंधु तिर्की लगातार आदिवासी अधिकार और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं. ऐसे में उनका पलटवार सिर्फ समीर उरांव के आरोपों का जवाब नहीं, बल्कि परिसीमन और आदिवासी पहचान को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा भी माना जा रहा है.
दो आदिवासी नेताओं की जुबानी जंग के सियासी मायने
समीर उरांव और बंधु तिर्की दोनों झारखंड की आदिवासी राजनीति में महत्वपूर्ण चेहरे हैं. एक ओर बीजेपी परिसीमन और आदिवासी मुद्दों पर अपनी राजनीतिक लाइन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के बंधु तिर्की इन मुद्दों पर बीजेपी को घेरते रहे हैं.
अब सवाल यह है कि परिसीमन का मुद्दा आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा? क्या परिसीमन के साथ आदिवासी पहचान और सरना धर्म का मुद्दा भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा? और क्या समीर उरांव तथा बंधु तिर्की के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होगी?
फिलहाल इतना साफ है कि परिसीमन के मुद्दे पर झारखंड की आदिवासी राजनीति में टकराव बढ़ता जा रहा है और इस टकराव के केंद्र में अब बीजेपी के समीर उरांव और कांग्रेस के बंधु तिर्की आमने-सामने हैं.


