Jharkhand Weather: 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 40 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, IMD की चेतावनी
झारखंड में 28 और 29 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा समेत कई जिलों में तेज बारिश, मेघ गर्जन और 40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

Ranchi: झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है. मौसम विभाग ने 28 और 29 जुलाई को राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है. खासकर पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है. इसके अलावा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और मेघ गर्जन के साथ वज्रपात की भी संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है.
28 और 29 जुलाई को कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार और मंगलवार को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहेंगे. राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन और वज्रपात होने की संभावना है. दक्षिणी और मध्य झारखंड के इलाकों में बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है. पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इन जिलों में तेज बारिश के कारण जलभराव और स्थानीय स्तर पर जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है. लगातार हो रही बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं अधिकतम तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है. मौसम विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है.
40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं
बारिश के साथ राज्य के कई हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है. तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने, बिजली के खंभों के पास जाने और खुले मैदानों में रहने से बचने की सलाह दी गई है. मौसम विभाग का कहना है कि 30 जुलाई को भी राज्य में मौसम पूरी तरह साफ नहीं होगा. कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या बूंदाबांदी जारी रह सकती है. हालांकि, पिछले दो दिनों की तुलना में बारिश की तीव्रता कुछ कम रहने की संभावना है. पूरे सप्ताह तापमान में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है.
बंगाल की खाड़ी में बने डिप्रेशन से सक्रिय हुआ मानसून
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना निम्न दबाव का क्षेत्र गहराकर डिप्रेशन में बदल गया है. इसी मौसम प्रणाली के प्रभाव से झारखंड में मानसून दोबारा सक्रिय हो गया है. इसके कारण राज्य के कई हिस्सों में लगातार हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है. डिप्रेशन के प्रभाव से दक्षिणी और पश्चिमी जिलों में अधिक बारिश होने की संभावना है. ऐसे में किसानों, यात्रियों और आम लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है.
सिमडेगा में सबसे ज्यादा बारिश, तापमान में भी बदलाव
बीते 24 घंटों के दौरान झारखंड में सबसे अधिक 23.0 मिलीमीटर बारिश सिमडेगा जिले में दर्ज की गई. वहीं डाल्टनगंज राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. दूसरी ओर लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. मौसम विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान में 2.1 से 4.0 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि अधिकांश जिलों में तापमान सामान्य के आसपास बना रहा. बारिश की वजह से आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिल सकती है.
56 दिनों में सामान्य से 29% कम बारिश, खेती पर बढ़ी चिंता
हालांकि मानसून सक्रिय है, लेकिन पूरे सीजन की बात करें तो झारखंड अब भी सामान्य से कम बारिश की समस्या से जूझ रहा है. पिछले 56 दिनों में राज्य में औसतन 29 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. सबसे अधिक बारिश सिमडेगा, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में रिकॉर्ड की गई है. वहीं गढ़वा, चतरा, कोडरमा, पलामू और देवघर जैसे जिलों में सबसे कम बारिश हुई है. कई इलाकों में 40 से 60 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज होने के कारण धान समेत खरीफ फसलों की खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों की चिंता और बढ़ सकती है.

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