खजाना खाली या फाइल दबी? 10 हजार करोड़ मामले में सरकार और नौकरशाही पर उठे सवाल
झारखंड सरकार के खजाने से ₹10,000 करोड़ गायब होने के आरोप पर सियासी बवाल तेज हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और जेडीयू विधायक सरयू राय ने वित्तीय अनियमितता और जांच में जानबूझकर देरी का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है.

Ranchi: झारखंड सरकार के खजाने से कथित रूप से ₹10,000 करोड़ की राशि गायब होने का मामला सियासी तूफान का रूप लेता जा रहा है. राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पश्चिम सिंहभूम से जेडीयू विधायक सरयू राय ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और शीर्ष नौकरशाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वित्त मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मामले की जांच आगे नहीं बढ़ाई गई. विपक्ष का आरोप है कि जानबूझकर फाइल को लंबित रखा गया है, जिससे सरकार की नीयत और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी का आरोप: जानबूझकर दबाया जा रहा है मामला
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्वीट में सरकार पर सीधे तौर पर गंभीर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, “झारखंड सरकार के खजाने से ₹10,000 करोड़ की राशि गायब है. वित्त मंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वित्त सचिव सभी विभागों के सचिवों की बैठक बुलाकर विस्तृत हिसाब लिया जाए, लेकिन वित्त सचिव द्वारा मंत्री के आदेश का पालन करने के बजाय फाइल को मुख्य सचिव के पास भेज दिया गया, जहां वह पिछले तीन महीनों से लंबित पड़ी है.” मरांडी ने आगे सवाल उठाया कि सरकार जांच से क्यों बच रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव पर भी संदेह जताते हुए कहा, “मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव द्वारा जानबूझकर मामले को दबाने या टालने का प्रयास किया जा रहा है. मुख्य सचिव को बताना चाहिए कि तीन महीने से फाइल पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई.” उन्होंने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए जांच की मांग की.
सरयू राय ने भी उठाई सरकारी सुस्ती पर उंगली
जेडीयू विधायक सरयू राय ने भी इसी मुद्दे पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. उन्होंने ट्वीट किया, “झारखंड सरकार के खजाना से ग़ायब ₹10,000 करोड़ का पता लगाने में सरकारी सुस्ती किस कारण है? वित्त मंत्री ने वित्त सचिव को आदेश दिया कि सभी विभागों के सचिवों की बैठक बुलाकर हिसाब माँगिए, पर मंत्री का आदेश मानने के बदले सचिव ने इसे मुख्य सचिव के पास भेज दिया जो 3 माह से वहीं पड़ा है.” सरयू राय का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय मामले में देरी अपने आप में संदेह पैदा करती है. विपक्षी नेताओं के इन आरोपों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब सरकार की ओर से जवाब का इंतजार किया जा रहा है.

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