22 साल बाद फहीम खान के घर फायरिंग मामले में फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद
धनबाद के चर्चित वासेपुर फायरिंग मामले में करीब 22 साल बाद अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को उम्रकैद की सजा सुनाई है. 2004 में फहीम खान के घर हुई AK-47 से फायरिंग में उनके बॉडीगार्ड विनोद शर्मा की मौत हो गई थी.

Dhanbad: चर्चित वासेपुर फायरिंग मामले में करीब 22 साल बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया है. 29 जनवरी 2004 को गैंगस्टर फहीम खान के घर पर AK-47 से की गई गोलीबारी के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शनिवार को सजा सुनाई. मामले में शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है. इससे पहले 28 सितंबर को अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया था. मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अब जाकर इस पुराने केस में न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा का फैसला सामने आया है.
वासेपुर में फहीम खान के घर हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 29 जनवरी 2004 को वासेपुर में फहीम खान के घर पर अचानक AK-47 से गोलियां चलने लगी थीं. फायरिंग इतनी तेज थी कि इलाके में अफरा-तफरी मच गई. हमलावरों से बचने के लिए फहीम खान पड़ोसी की छत पर कूद गए थे. इसी दौरान उनके बॉडीगार्ड विनोद शर्मा को गोली लगी थी. बिहार के अरवल के रहने वाले विनोद शर्मा की इस घटना में मौत हो गई थी. घटना के दौरान शाहिद आलम के पैर में भी गोली लगने की बात सामने आई थी. पुलिस जांच के बाद मामले में साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर निवासी शहादत हुसैन और पटना निवासी तनवीर आलम के खिलाफ मामला चला.
हत्या के साथ साजिश और हत्या के प्रयास की धाराएं भी लगीं
अदालत ने तीनों दोषियों को भारतीय दंड कानून की धारा 302 के तहत हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके अलावा आपराधिक साजिश से जुड़ी धारा 120बी और धारा 149 के तहत भी उम्रकैद दी गई है. आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सात साल और हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 307 के तहत 10 साल की सजा सुनाई गई. पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता शाहबाज सलाम के अनुसार अदालत ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया है. यानी अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजाओं की अवधि समानांतर रूप से चलेगी.
28 सितंबर को तीनों को दोषी करार दिया गया था
इस मामले में अदालत ने 28 सितंबर को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था. दोषसिद्धि के बाद अदालत में सजा की अवधि को लेकर सुनवाई हुई और शनिवार को अंतिम फैसला सुनाया गया. करीब दो दशक से ज्यादा समय तक चले इस मामले में गवाहों, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में तीनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं के तहत सजा सुनाई गई. इस फैसले के साथ 2004 में हुई फायरिंग और हत्या से जुड़े इस पुराने मामले की सुनवाई का अहम चरण पूरा हुआ.
फायरिंग में फहीम खान बच निकले, बॉडीगार्ड की हुई थी मौत
मामले की सबसे अहम कड़ी 2004 की वह गोलीबारी थी, जिसमें हमलावरों ने फहीम खान को निशाना बनाया था. अचानक हुई फायरिंग के बीच फहीम खान ने पड़ोसी की छत पर पहुंचकर अपनी जान बचाई थी. हालांकि उनके साथ मौजूद बॉडीगार्ड विनोद शर्मा गोली लगने से मारे गए. इस घटना ने उस दौर में वासेपुर की आपराधिक घटनाओं को लेकर काफी चर्चा पैदा की थी. अब 22 साल बाद अदालत के फैसले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास की धाराओं में मिली अतिरिक्त सजा भी साथ-साथ चलेगी.


