मुंबई में गिरिडीह और गोमिया के दो प्रवासी मजदूरों की मौत, महेश और हीरालाल के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
“झारखंड के गिरिडीह और बोकारो के दो प्रवासी मजदूरों की मुंबई में इलाज के दौरान मौत हो गई. महेश रविदास और हीरालाल नायक की मौत के बाद दोनों परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है. पीछे पत्नी और छोटे बच्चों को छोड़ गए मजदूरों के परिवारों ने शव गांव लाने, आर्थिक सहायता और निष्पक्ष जांच की मांग की है. ”

Giridih/Bokaro: झारखंड के गांवों से रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले प्रवासी मजदूरों की जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द यही है कि वे परिवार का पेट पालने के लिए घर से दूर जाते हैं, लेकिन उनके लौटने का भरोसा हमेशा बना नहीं रहता. गिरिडीह और गोमिया के दो परिवारों पर हाल में ऐसा ही दुख टूटा है. मुंबई में इलाज के दौरान गिरिडीह के बगोदर प्रखंड के तिरला पंचायत निवासी महेश रविदास (45) और गोमिया प्रखंड के चतरोचट्टी निवासी हीरालाल नायक की मौत हो गई. दोनों परिवारों में कमाने वाले पुरुष की मौत ने आर्थिक संकट के साथ बच्चों और परिजनों के सामने भविष्य की चिंता खड़ी कर दी है. इन घटनाओं ने फिर सवाल उठाया है कि आखिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके परिवारों की मदद के लिए व्यवस्था कितनी मजबूत है.
महेश रविदास की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बगोदर प्रखंड के तिरला पंचायत निवासी महेश रविदास, स्वर्गीय दासो रविदास के पुत्र थे. मुंबई में इलाज के दौरान शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई. मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया. महेश अपने पीछे पत्नी अम्बिया देवी, पुत्र अनोज कुमार (21) और पुत्रियों प्रीति कुमारी (20) व प्रियंका कुमारी (17) को छोड़ गए हैं. परिवार के लिए महेश ही अहम आर्थिक सहारा थे. उनकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च और भविष्य को लेकर संकट गहरा गया है. घटना की जानकारी मिलने पर प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सिकंदर अली परिवार से मिले और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया. परिजनों ने शव गांव लाने, सरकारी मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है.
हीरालाल नायक की मौत, दो मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
गोमिया प्रखंड के चतरोचट्टी निवासी हीरालाल नायक मुंबई के एक होटल में मजदूरी करते थे. परिवार की खुशहाली के लिए घर से दूर गए हीरालाल की शुक्रवार को मुंबई के जेजे अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. परिजनों के मुताबिक होटल मालिक से पैसों को लेकर विवाद के बाद हीरालाल घायल अवस्था में रेलवे पुलिस को मिले थे. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 13 दिनों तक इलाज चला. हीरालाल अपने पीछे पत्नी अनीता देवी और दो छोटी बेटियां अंशिका (करीब साढ़े तीन वर्ष) और कीर्तिका (करीब डेढ़ वर्ष) को छोड़ गए. जिस उम्र में बेटियां पिता की गोद और उंगली के सहारे बड़ी होतीं, उसी उम्र में उनका सिर पिता के साये से खाली हो गया.
एक ही दर्द, कमाने वाले गए तो परिवार के सामने आर्थिक संकट
महेश रविदास और हीरालाल नायक की मौत अलग-अलग परिस्थितियों में हुई, लेकिन दोनों परिवारों की पीड़ा एक जैसी है. घर चलाने और बच्चों का भविष्य संवारने की उम्मीद लेकर निकले मजदूर अब वापस नहीं लौटेंगे. पीछे पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग परिजन रह गए हैं, जिन्हें अब भावनात्मक दर्द के साथ आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना होगा. हीरालाल के मामले में परिजनों ने होटल मालिक से विवाद और उसके बाद घायल अवस्था में मिलने की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है. सिकंदर अली ने दोनों परिवारों को सहयोग का भरोसा दिया है और शवों को मुंबई से पैतृक गांव पहुंचाने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है. परिवारों ने आर्थिक और कानूनी सहायता की अपील भी की है.
हर दिन अनहोनी के डर में गुजरता है प्रवासी मजदूरों के परिवार का जीवन
झारखंड के हजारों गरीब परिवारों के लिए प्रवासी मजदूरी मजबूरी है. बेहतर रोजगार और आमदनी के लिए पति, पिता या बेटा दूसरे राज्यों में जाता है और पीछे परिवार उसके लौटने का इंतजार करता है. फोन की हर घंटी उम्मीद भी देती है और अनहोनी का डर भी पैदा करती है. काम की कठिन परिस्थितियां, इलाज की दिक्कत, दुर्घटनाएं और रोजगार से जुड़े विवाद कई बार मजदूरों और उनके परिवारों की जिंदगी बदल देते हैं. महेश रविदास और हीरालाल नायक की मौत ने इसी दर्द को सामने ला दिया है. जरूरत है कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, आपातकालीन सहायता, शव को घर पहुंचाने और उनके परिवारों को त्वरित आर्थिक व कानूनी मदद की व्यवस्था मजबूत हो, ताकि मजबूरी में घर से दूर जाने वालों के परिवार अकेले न पड़ें.

