Bawal News की खबर का बड़ा असर, अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग खिलाड़ी महिमा उरांव को मिला अबुआ आवास, पहली किस्त भी जारी
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग थ्रो बॉल खिलाड़ी महिमा उरांव का पक्के घर का सपना अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ गया है. Bawal News की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद महिमा को अबुआ आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिल गई है. साथ ही पहली किस्त भी जारी कर दी गई है.

Bawal Desk: कभी मिट्टी के जर्जर घर में रहने को मजबूर महिमा उरांव की आंखों में अपने पक्के घर का सपना था. खेल के मैदान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का नाम रोशन करने वाली इस दिव्यांग खिलाड़ी की जिंदगी की मुश्किलें तब सामने आईं, जब Bawal News की टीम उनके घर पहुंची. घर की बदहाल स्थिति, आर्थिक तंगी और रोजमर्रा की परेशानियों को देखकर महिमा कैमरे के सामने अपने आंसू नहीं रोक पाई थीं. उनकी आंखों से छलके आंसुओं ने यह सवाल खड़ा किया था कि देश और राज्य का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी को आखिर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है. Bawal News ने महिमा की इस पीड़ा और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रमुखता से दिखाया था. अब इस खबर का असर सामने आया है. अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग थ्रो बॉल खिलाड़ी महिमा उरांव को अबुआ आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिल गई है. इतना ही नहीं, उन्हें आवास की पहली किस्त भी प्रदान कर दी गई है.
मिट्टी के घर से पक्के मकान तक का सपना होगा पूरा
नामकुम प्रखंड के सोदाग बगीचा टोली की रहने वाली महिमा उरांव को प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से अबुआ आवास योजना का स्वीकृति पत्र सौंपा गया. इसके साथ ही योजना की पहली किस्त भी जारी की गई. जिस घर की बदहाली को Bawal News ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया था, अब उसी घर की जगह पक्के मकान का सपना साकार होने की उम्मीद जगी है. महिमा के लिए यह सिर्फ एक सरकारी योजना का लाभ नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष के बाद मिली एक बड़ी राहत है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ी के लिए सुरक्षित और बेहतर आवास की व्यवस्था होना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है.
Bawal News ने दिखाई थी महिमा की बदहाली, कैमरे पर छलक पड़े थे आंसू
महिमा उरांव की कहानी सामने लाने के लिए Bawal News की टीम उनके घर पहुंची थी. वहां की स्थिति देखकर यह साफ था कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के बावजूद महिमा और उनके परिवार को आर्थिक तंगी के बीच जीवन गुजारना पड़ रहा था. मिट्टी का घर, सीमित संसाधन और बुनियादी सुविधाओं की कमी उनकी परेशानियों को बयां कर रही थी. बातचीत के दौरान जब महिमा ने अपनी परिस्थितियों के बारे में बताया तो कैमरे के सामने उनकी आंखें भर आईं. उनकी पीड़ा सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत परेशानी नहीं थी, बल्कि उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की स्थिति पर भी सवाल थी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बावजूद सामान्य जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं. Bawal News ने उनकी आवाज को जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की थी. अब आवास की स्वीकृति मिलने के बाद इस पहल को खबर के सकारात्मक असर के रूप में देखा जा रहा है.
मुखिया बोले- प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को योजनाओं का लाभ दिलाना प्राथमिकता
इस मौके पर मुखिया पतरस तिर्की ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय थ्रो बॉल खिलाड़ी महिमा उरांव ने अपनी प्रतिभा से क्षेत्र और झारखंड का नाम रोशन किया है. उन्हें अबुआ आवास योजना का लाभ दिलाने की पहल सराहनीय है. उन्होंने कहा कि पंचायत के प्रतिभावान खिलाड़ियों और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना उनकी प्राथमिकता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके. कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रिया प्रियंका हेमरोम, मुखिया पतरस तिर्की, कोच मुकेश कंचन, वार्ड सदस्य प्रिया गाड़ी, पंचायत सचिव विक्रम कुमार महतो, जनसेवक एमलेन स्वेता मिंज, सिमोन बखला, विकास बखला, नीलमनी खोया, मेरी नागडुवार, पूनम तिर्की और सिबनाथ बखला समेत अन्य लोग मौजूद रहे.
दिव्यांग खिलाड़ी और सामाजिक संगठनों ने जताई खुशी
महिमा उरांव को आवास की स्वीकृति मिलने पर दिव्यांगजनों के अधिकार और समावेश के लिए काम करने वाले लोगों ने भी खुशी जाहिर की. डॉ. राहुल मेहता, सरिता सिन्हा, पवन लकड़ा, निशा मेहता सहित झारखंड विकलांग जन फोरम के सदस्यों और पैरा स्पोर्ट्स खिलाड़ियों ने इस पहल का स्वागत किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि महिमा की तरह दूसरे दिव्यांग खिलाड़ियों और जरूरतमंद परिवारों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने महिमा को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
महिमा की कहानी अब एक नई उम्मीद लेकर आई है. जिस खिलाड़ी की आंखों में कभी अपने मिट्टी के घर की बदहाली बताते हुए आंसू थे, आज उसी खिलाड़ी के पक्के घर का सपना पूरा होने की दिशा में पहला कदम उठ चुका है. Bawal News की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद मिली यह राहत बताती है कि जब किसी जरूरतमंद की आवाज सही मंच तक पहुंचती है, तो बदलाव की पहल भी शुरू हो सकती है.

