पारसनाथ में पूजा और FIR पर सियासी घमासान, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से पूछा- ग्रामीणों को क्यों बनाया जा रहा निशाना?
पारसनाथ के मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान में जुलाई 2024 में हुई पूजा-अर्चना का मामला फिर चर्चा में है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पांच स्थानीय आदिवासियों को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने पर सवाल उठाए हैं.

Ranchi: झारखंड के पारसनाथ स्थित मरांग बुरु में जुलाई 2024 में हुई पूजा-अर्चना का मामला एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस मामले में पांच स्थानीय आदिवासियों को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं. मरांडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन की मौजूदगी में दिशोम मांझीथान में पारंपरिक पूजा हुई थी, लेकिन बाद में इसी घटना को लेकर दर्ज प्राथमिकी की आड़ में स्थानीय ग्रामीणों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 का हवाला देते हुए पांच आदिवासियों को तत्काल राहत देने की मांग की है. साथ ही पूजा के दौरान आठ बकरे गायब होने के आरोपों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है.
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में 19 जुलाई 2024 की घटना का जिक्र किया है. उनके मुताबिक, गांडेय उपचुनाव में जीत और हेमंत सोरेन की जेल से रिहाई के बाद पूरी हुई मन्नत के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ मरांग बुरु स्थित दिशोम मांझीथान पहुंचे थे. वहां संथाल आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई थी. पत्र में दावा किया गया है कि पूजा के दौरान नौ बकरे समर्पित किए गए थे, जिनमें से एक की बलि नायके बाबा ने दी थी. मरांडी ने ग्रामीणों के हवाले से आरोप लगाया है कि पूजा की व्यवस्था में लगे अधिकारियों की मौजूदगी में बाकी आठ बकरे पूजा स्थल से गायब हो गए थे. इसके बाद 24 जुलाई 2024 को प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के आवेदन पर मधुबन थाना में कांड संख्या 13/24 दर्ज की गई. इसमें धार्मिक भावनाएं आहत करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं. मरांडी का सवाल है कि जब पूजा मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई थी, तो इसके लिए स्थानीय आदिवासियों को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा रहा है?
सम्मेद शिखरजी के नियमों और आदिवासी परंपरा पर सरकार से मांगा जवाब
इस पूरे विवाद में पारसनाथ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी अहम मुद्दा बन गई है. एक तरफ सम्मेद शिखरजी जैन धर्मावलंबियों का पवित्र तीर्थस्थल है, जहां मांस और मदिरा को लेकर प्रतिबंधों का हवाला दिया जाता है. दूसरी तरफ संथाल आदिवासी समाज मरांग बुरु को अपनी आस्था और पारंपरिक पूजा पद्धति का महत्वपूर्ण केंद्र मानता है. बाबूलाल मरांडी ने इसी विरोधाभास को उठाते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पारसनाथ क्षेत्र में संथाल समाज की पारंपरिक पूजा पद्धतियों और सम्मेद शिखरजी से जुड़े धार्मिक नियमों के बीच समन्वय कैसे बनाया जाएगा. उनके मुताबिक, नीतिगत अस्पष्टता के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और भविष्य में भी धार्मिक-सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है.
आठ बकरों के गायब होने के आरोप की जांच की मांग
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बाबूलाल मरांडी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. पहली, साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम के खिलाफ कथित पुलिस प्रताड़ना तत्काल रोकी जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. दूसरी, 19 जुलाई 2024 को पूजा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और आठ बकरे गायब होने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच हो. दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए. तीसरी मांग पारसनाथ क्षेत्र में आदिवासी समाज की पारंपरिक पूजा और सम्मेद शिखरजी से जुड़े नियमों पर सरकार की स्पष्ट नीति तय करने की है. मरांडी ने मुख्यमंत्री से मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने की अपील की है.




