दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड, 150 पुलिसकर्मियों ने किया था विरोध
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर 150 पुलिसकर्मियों के साथ प्रदर्शन करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया गया है. जानिए शाहदरा थाने में वकील और पुलिस के बीच विवाद से लेकर ACP के निलंबन तक की पूरी कहानी.

Delhi: दिल्ली पुलिस में एक बार फिर पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के बीच विवाद सामने आया है. दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर करीब 150 पुलिसकर्मियों के साथ विरोध प्रदर्शन करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद के बाद दो अधिकारियों के तबादले किए गए थे. इसी फैसले के विरोध में ACP मनस्वी वशिष्ठ ने पुलिसकर्मियों के साथ मुख्यालय के बाहर धरना दिया था. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन SHO अरुण कुमार की पुरानी तैनाती बहाल की जाए. अब इस पूरे मामले में ACP के निलंबन से दिल्ली पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है.
23 अक्टूबर को शाहदरा थाने से शुरू हुआ पूरा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई एक घटना से हुई थी. जानकारी के मुताबिक, थाने में वकील ललित बंसल और पुलिसकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई थी. देखते ही देखते मामला बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई. इस दौरान वकील ललित बंसल को सिर में गंभीर चोट लगने का आरोप भी सामने आया. वहीं, ACP मनस्वी वशिष्ठ पर आरोप लगा कि उन्होंने विवाद के दौरान अपनी रिवॉल्वर निकाल ली थी. हालांकि, इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे थे. घटना के बाद वकीलों में नाराजगी फैल गई और शाहदरा थाने के बाहर विरोध शुरू हो गया. धीरे-धीरे यह मामला दिल्ली की जिला अदालतों तक पहुंच गया और वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी.
अधिकारियों के तबादले के बाद खत्म हुई वकीलों की हड़ताल
शाहदरा थाने की घटना के बाद वकीलों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया था. इस मामले में ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार की भूमिका भी चर्चा में रही. विवाद बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया गया. इसके बाद वकीलों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और अदालतों में जारी हड़ताल भी वापस ले ली गई. हालांकि, अधिकारियों के तबादले का फैसला पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों को मंजूर नहीं था. उनका मानना था कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई उचित नहीं है. इसी नाराजगी के चलते पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारियों के समर्थन में एकजुट होने का फैसला किया. इसके बाद मामला वकीलों के विरोध से निकलकर पुलिस विभाग के अंदरूनी असंतोष तक पहुंच गया.
पुलिस मुख्यालय के बाहर 150 जवानों के साथ धरने पर बैठे ACP
अधिकारियों के तबादले के विरोध में ACP मनस्वी वशिष्ठ सोमवार को करीब 150 पुलिसकर्मियों के साथ दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंच गए. यहां गेट नंबर एक के बाहर पुलिसकर्मियों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं. उनके हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं, जिन पर 'वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे' जैसे नारे लिखे हुए थे. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन SHO अरुण कुमार की पुरानी तैनाती बहाल की जाए. इसके अलावा उन्होंने पुलिसकर्मियों से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए. बताया जाता है कि पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन में शामिल होने की अपील दिल्ली पुलिस के विभिन्न व्हाट्सऐप समूहों के जरिए भेजी गई थी. हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों ने जिला पुलिस उपायुक्तों और यूनिट प्रमुखों को अपने कर्मचारियों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के निर्देश भी दिए थे.
वरिष्ठ अधिकारियों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं माने प्रदर्शनकारी
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बन गई. हालात को संभालने के लिए नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से बातचीत कर उन्हें धरना समाप्त करने के लिए मनाने की कोशिश की. इस दौरान DCP सचिन शर्मा को ACP मनस्वी वशिष्ठ से बातचीत करते हुए भी देखा गया. उन्होंने पुलिसकर्मियों को अनुशासन बनाए रखने की याद दिलाई और कहा कि पुलिस बल के सदस्यों से प्रदर्शनकारियों जैसा व्यवहार करने की अपेक्षा नहीं की जाती. उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों को अपने साथ पुलिस मुख्यालय के अंदर चलकर बातचीत करने का प्रस्ताव भी दिया. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. उनकी मांग थी कि पुलिस आयुक्त के साथ सीधे संवाद सत्र आयोजित किया जाए, ताकि उनकी शिकायतों और मांगों पर वरिष्ठ स्तर पर बात हो सके.

