BRICS Business Forum में बोले पीएम मोदी, समुद्री मार्गों की सुरक्षा के बिना वैश्विक व्यापार अधूरा
BRICS Business Forum में PM मोदी ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा, नाविकों की हिफाजत और वैश्विक व्यापार को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया. पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल ट्रेड तभी आगे बढ़ सकता है, जब समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, सप्लाई रूट खुले हों और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Business Forum को संबोधित करते हुए वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर भारत का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है, जब समुद्री रास्ते सुरक्षित हों, सप्लाई रूट खुले रहें और समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच पीएम मोदी का यह संदेश बेहद अहम माना जा रहा है. उनके बयान में ईरान, अमेरिका और वैश्विक व्यापार से जुड़े मौजूदा संकट के बीच भारत की संतुलित कूटनीति की झलक भी दिखाई दी.
BRICS बना वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र
पीएम मोदी ने कहा कि 2006 में जब BRICS की शुरुआत हुई थी, तब इसमें केवल चार देश शामिल थे. आज BRICS और उसके पार्टनर देशों को मिलाकर यह 21 देशों का परिवार बन चुका है. उन्होंने बताया कि BRICS देश दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 25 प्रतिशत से अधिक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं. प्रधानमंत्री के मुताबिक, पिछले वर्षों में वैश्विक GDP करीब डेढ़ गुना बढ़ी, जबकि BRICS देशों की संयुक्त GDP लगभग साढ़े चार गुना बढ़ी है. इससे साफ है कि यह समूह अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच नहीं रहा, बल्कि वैश्विक आर्थिक फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाला समूह बन चुका है.
समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर भारत का जोर
BRICS Business Forum में पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार की रीढ़ समुद्री रास्ते हैं. अगर समुद्री मार्ग बाधित होते हैं, तो इसका सीधा असर तेल, गैस, खाद्य सामग्री, उर्वरक और दूसरी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर पड़ता है. भारत ने हमेशा नेविगेशन की आजादी और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा का समर्थन किया है. पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक समुद्री जहाजों पर काम करते हैं और देश का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर निर्भर है.
ईरान और वैश्विक तनाव के बीच भारत का संतुलित संदेश
BRICS मंच पर पीएम मोदी ने किसी एक देश का नाम लेकर सीधा आरोप लगाने के बजाय समुद्री सुरक्षा, संवाद और स्थिरता की बात की. भारत का संदेश साफ है कि किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार और आम लोगों की जिंदगी पर नहीं पड़ना चाहिए. ईरान से जुड़े तनाव के बीच भारत लगातार संवाद और कूटनीति को समाधान का रास्ता बता रहा है. भारत के लिए पश्चिम एशिया केवल रणनीतिक क्षेत्र नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों से जुड़ा हुआ इलाका भी है. ऐसे में समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना भारत की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है.
व्यापार, निवेश और नई आर्थिक साझेदारी पर फोकस
पीएम मोदी ने BRICS देशों से व्यापारिक बाधाएं कम करने और आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ाने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक पुल बनाने की दिशा में काम कर रहा है और दुनिया के कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं. भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता—इसी सोच को दर्शाती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सप्लाई चेन को मजबूत, भरोसेमंद और विविध बनाना समय की जरूरत है.
BRICS के विस्तार के साथ अब इस समूह के सामने बड़ी जिम्मेदारी भी है. उसे केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय व्यापार, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वित्तीय सहयोग के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने होंगे. भारत की कोशिश है कि BRICS वैश्विक तनाव के बीच संवाद का मंच बने और विकासशील देशों की आवाज को और मजबूत करे.

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