गैस किल्लत, अवैध खनन और ड्रग्स का मुद्दा गूंजा, झारखंड विधानसभा में सरकार-विपक्ष आमने-सामने
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को सदन में कई अहम मुद्दे जोर-शोर से उठे. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े सवालों और जनसमस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा.

Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को सदन में कई अहम मुद्दे जोर-शोर से उठे. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े सवालों और जनसमस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा. कहीं विस्थापितों के पुनर्वास का सवाल उठा तो कहीं अवैध ड्रग्स कारोबार पर सख्ती की मांग हुई. गैस सिलेंडर की कथित किल्लत को लेकर भी सदन में तीखी बहस देखने को मिली. साथ ही पंचायत गठन, सड़क निर्माण में गड़बड़ी और औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर भी विधायकों ने सरकार को घेरा. कई मामलों में संबंधित मंत्रियों ने कार्रवाई और जांच का आश्वासन दिया, जबकि कुछ मामलों में विपक्ष ने सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाए. कुल मिलाकर बजट सत्र का यह दिन विभिन्न जनहित के मुद्दों, आरोप-प्रत्यारोप और घोषणाओं के कारण काफी सक्रिय रहा.
कोल परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों का मुद्दा उठा
हजारीबाग जिले में चल रही कोल खनन परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों का मामला भी सदन में उठा. इसमें Suresh Paswan, Shweta Singh और Mamta Devi सहित कई विधायकों ने सवाल उठाया. विधायकों का कहना था कि एनटीपीसी की केरेडारी, चट्टी बरियातु समेत चार कोल परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण किया गया है. जानकारी के अनुसार 423 एकड़ रैयती जमीन, 198 एकड़ जीएम लैंड और 322 एकड़ वन भूमि अधिग्रहित की गई है. वहीं कुल अधिग्रहित जमीन का आंकड़ा 8361.65 एकड़ तक बताया गया. विधायकों ने सरकार से पूछा कि इतने बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण के बाद कितने परिवार विस्थापित हुए और उनमें से कितनों को आरआर पॉलिसी के तहत पुनर्वास, रोजगार और नियोजन की सुविधा दी गई. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कितने प्रभावित रैयतों को मुआवजा मिला और कितनों को अब तक रोजगार नहीं मिल पाया है.
ड्रग्स कारोबार पर सख्ती के लिए बनेगी जिला टास्क फोर्स
राज्य में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर भी सदन में चिंता जताई गई. विधायक Roshan Lal Choudhary ने हजारीबाग और रामगढ़ समेत कई इलाकों में फैल रहे ड्रग्स कारोबार का मुद्दा उठाया. इस पर जवाब देते हुए मंत्री Yogendra Mahto ने कहा कि राज्य सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है. उन्होंने घोषणा की कि अवैध ड्रग्स के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए हर जिले में विशेष टास्क फोर्स गठित की जाएगी. साथ ही ड्रग माफियाओं के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा. सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2023 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत 2396 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं 2023 से 2026 के बीच कई जिलों में ऐसे मामलों में और वृद्धि दर्ज की गई है. हाल के दिनों में करोड़ों रुपये के ड्रग्स की बरामदगी से राज्य में माफियाओं की सक्रियता का संकेत मिला है.
बीएसएल विस्थापित गांवों के लिए पंचायत गठन की मांग
बोकारो स्टील प्लांट से विस्थापित गांवों के लिए पंचायत गठन का मुद्दा भी सदन में प्रमुखता से उठा. माले विधायक Arup Chatterjee, कांग्रेस विधायक Shweta Singh और झामुमो विधायक Umakant Rajak ने सरकार को घेरते हुए कहा कि बीएसएल के कारण विस्थापित हुए 19 गांवों के लोगों को अब तक कई सरकारी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है. विधायकों ने बताया कि इन गांवों के लोगों को राशन कार्ड, आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने मांग की कि इन 19 गांवों को मिलाकर छह पंचायतों का गठन किया जाए. इस पर पंचायती राज मंत्री Deepika Pandey Singh ने कहा कि संबंधित क्षेत्र बीएसएल के लिए अधिग्रहित भूमि है. राज्य सरकार उस जमीन को वापस लेने की कोशिश कर रही है और जमीन वापसी के बाद पंचायत गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
क्लासिक इंजिकॉन के कामकाज पर उठे सवाल
रामगढ़ की विधायक Mamta Devi ने सदन में कंस्ट्रक्शन कंपनी क्लासिक इंजिकॉन के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कंपनी ने गोला-मुड़ी सड़क का घटिया निर्माण किया है और कई काम अधूरे छोड़ दिए हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी जनप्रतिनिधियों से समन्वय किए बिना काम करती है और शिलापट्ट पर स्थानीय प्रतिनिधियों का नाम भी दर्ज नहीं किया जाता. इस पर प्रभारी मंत्री Sudivya Kumar Sonu ने कहा कि बजट सत्र के बाद एक टीम बनाकर कंपनी के कार्यों की जांच कराई जाएगी. जांच के दौरान संबंधित विधायक भी मौजूद रहेंगी.
एचईसी विस्थापितों को जल्द मिलेगा आवास
सदन में एचईसी के विस्थापितों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठा. भाजपा विधायक Naveen Jaiswal ने सरकार से पूछा कि वर्षों पहले बनाए गए 400 आवासों में विस्थापितों को अब तक क्यों नहीं बसाया गया. जवाब में मंत्री Sudivya Kumar Sonu ने कहा कि विस्थापितों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है और अगले विधानसभा सत्र से पहले असली रैयतों को इन आवासों में शिफ्ट कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि पहले कराए गए सर्वे में 393 रैयतों की सूची दी गई थी, लेकिन जांच में पाया गया कि उनमें से 108 लोग बाहरी हैं. इसलिए रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है ताकि केवल असली रैयतों को ही लाभ मिल सके.
गैस सिलेंडर की कमी पर विपक्ष का हमला
गैस सिलेंडर की कथित कमी को लेकर नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राज्य में गैस या पेट्रोल की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि कुछ लोग जानबूझकर कृत्रिम संकट पैदा कर रहे हैं ताकि कालाबाजारी हो सके. मरांडी ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि पहले राज्य में गैस की आपूर्ति कितनी थी और वर्तमान में कितनी खपत हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कृत्रिम संकट पैदा कर कुछ लोग अपने करीबी लोगों को कालाबाजारी का मौका दे रहे हैं.
अवैध खनन और कानून व्यवस्था पर भी उठे सवाल
सदन में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में अवैध खनन और कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बालू, पत्थर, कोयला और आयरन की अवैध चोरी से राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में पुलिस कोयला चोरी रोकने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही है. साथ ही एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर भी चिंता जताई.

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