झारखंड में कचरा प्रबंधन व्यवस्था होगी हाईटेक, विकास आयुक्त ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
झारखंड सरकार ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में तैयारी तेज कर दी है. गुरुवार को विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने को लेकर विस्तृत

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में तैयारी तेज कर दी है. गुरुवार को विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक में कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और सभी जिलों के उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े. सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में वैज्ञानिक तरीके से कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छता व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सके. बैठक में पंचायत स्तर तक ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने, प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को व्यवस्थित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए.
कोर कमेटी की पहली अहम बैठक
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू किए गए ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 को झारखंड में भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा. इसके क्रियान्वयन और मॉनीटरिंग के लिए गठित राज्य स्तरीय कोर कमेटी की यह पहली बैठक थी. बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबू इमरान, नगर विकास विभाग के सचिव सुनील कुमार, पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीक पी, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी, पंचायती राज विभाग की निदेशक राजेश्वरी बी, नगर आयुक्त सुशांत गौरव और सूडा के निदेशक सूरज कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
जिलों में तैयार होगा एक्शन प्लान
विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने सभी संबंधित विभागों को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर उसे धरातल पर लागू करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में यह सुनिश्चित किया जाए कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2026 के अनुरूप काम व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा है या नहीं. उन्होंने उपायुक्तों को पंचायत स्तर पर कचरा पृथक्करण (सेग्रीगेशन) के लिए स्थल चिह्नित करने और वहां प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार करने का निर्देश दिया.
हर जिले में विकसित होंगे क्लस्टर
बैठक में प्रत्येक जिले में दो से तीन क्लस्टर विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई. इन क्लस्टरों में वैज्ञानिक तरीके से कचरे की डंपिंग और प्रोसेसिंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी. विकास आयुक्त ने कहा कि 50 से 60 किलोमीटर के दायरे में सेंटर पॉइंट बनाकर कचरा प्रोसेसिंग की व्यवस्था की जाए. साथ ही प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी जिला परिषद को भी दिए जाने का सुझाव दिया गया.
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पर जोर
बैठक में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए थर्ड पार्टी एजेंसी को जोड़ने पर भी बल दिया गया. एजेंसी घरों से कचरा एकत्र कर उसे प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाएगी. इसके अलावा पंचायतों की जवाबदेही तय करने और पंचायत स्तर से कचरा संग्रहण कर उसे सेग्रीगेशन प्लांट तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया गया.
गांवों में ट्राई-साइकिल और ई-रिक्शा मॉडल
ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा संग्रहण को बेहतर बनाने के लिए ट्राई-साइकिल के उपयोग पर जोर दिया गया. विकास आयुक्त ने एक मानक डिजाइन वाला ई-रिक्शा विकसित करने का निर्देश भी दिया, जिसमें चार अलग-अलग डिब्बे हों ताकि विभिन्न प्रकार के कचरे को अलग-अलग रखा जा सके. इसके लिए विस्तृत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए.
डंप साइट की सफाई और वृक्षारोपण का निर्देश
विकास आयुक्त ने सभी जिलों को अपने-अपने डंप साइट की सफाई सुनिश्चित करने और खाली भूमि पर वृक्षारोपण की योजना तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कई जिलों में भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रोसेसिंग प्लांट शुरू नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे क्षेत्रों में भूमि उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया.
आबादी से दूर बनेंगे प्रोसेसिंग प्लांट
बैठक में यह भी स्पष्ट निर्देश दिया गया कि कचरा प्रोसेसिंग प्लांट आबादी वाले क्षेत्रों, अस्पतालों और जलापूर्ति स्रोतों से दूर स्थापित किए जाएं, ताकि लोगों के स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.

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