झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! सुखदेवनगर दखल दिहानी मामले में नया ट्विस्ट
सुखदेवनगर क्षेत्र में कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी रूप से और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता महादेव उरांव के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए अवमानना नोटिस जारी किया है.

Ranchi: सुखदेवनगर क्षेत्र में कथित अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी रूप से और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता महादेव उरांव के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए अवमानना नोटिस जारी किया है. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने शपथ पत्र में तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया और कोर्ट से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का प्रयास किया. मामला खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित उस जमीन से जुड़ा है, जहां जिला प्रशासन ने 12 मकानों को अवैध कब्जा बताते हुए हटाने की कार्रवाई शुरू की थी. प्रभावित परिवारों का दावा है कि उन्होंने विधिवत भुगतान कर जमीन खरीदी थी और कई वर्षों से वहां रह रहे हैं. हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रभावित लोगों को राहत देते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक जारी रखी है. मामले की अगली सुनवाई 19 जून को तय की गई है.
हाईकोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल जवाब पर असंतोष व्यक्त किया. कोर्ट का मानना है कि मामले से जुड़े कुछ अहम तथ्यों को छिपाया गया, खासकर जमीन को लेकर हुए पैसों के लेनदेन और समझौते की जानकारी. न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए पूछा कि आखिर क्यों न याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना और अन्य कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए. इसी के तहत उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.
प्रभावित परिवारों को मिली अंतरिम राहत
मामले में हस्तक्षेप करने वाले स्थानीय निवासियों को अदालत से फिलहाल राहत मिली है. हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर प्रशासनिक कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक बरकरार रखी है. प्रभावित लोगों की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि उन्होंने जमीन खरीदने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था और लंबे समय से वहां अपने परिवार के साथ रह रहे हैं. उनका कहना है कि बिना पर्याप्त सुनवाई के मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई.
प्रशासनिक कार्रवाई और विवाद की पूरी कहानी
जिला प्रशासन का कहना है कि संबंधित जमीन मुंडारी प्रकृति की है और उस पर अवैध निर्माण किया गया था. प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि प्रभावित लोगों को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए. इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई. हालांकि कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि कब्जा हटाने की प्रक्रिया के बजाय सीधे निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई क्यों की गई. अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 19 जून को होगी, जिस पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है.

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