Ranchi: झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासत तेज़ हो गई है. राज्य में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बार चुनाव दलगत आधार पर नहीं कराए जा रहे हैं. इसी फैसले को लेकर बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार पर सीधा हमला बोला है. बीजेपी का कहना है कि सरकार इस बात से डरी हुई है कि अगर नगर निकाय चुनाव दलगत आधार पर हुए, तो सत्ता पक्ष का सूपड़ा साफ हो सकता है. इसी मुद्दे को लेकर आज रांची स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में कोर कमेटी की अहम बैठक बुलाई गई. यह बैठक करीब तीन घंटे तक बंद कमरे में चली, जिसमें नगर निकाय चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन की स्थिति और चुनावी रणनीति पर मंथन किया. बैठक में यह साफ हो गया कि भले ही चुनाव गैर-दलगत हों, लेकिन बीजेपी इन्हें पूरी तरह राजनीतिक तौर पर लड़ने की तैयारी में है.
कोर कमेटी में बनी चुनावी रणनीति
कोर कमेटी की बैठक में यह सामने आया कि नगर निकाय चुनाव को लेकर पार्टी के कई कार्यकर्ता मैदान में उतरने के इच्छुक हैं. मेयर, अध्यक्ष और पार्षद जैसे पदों के लिए एक ही निकाय क्षेत्र से कई दावेदार हो सकते हैं. ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आपसी प्रतिस्पर्धा से नुकसान न हो. इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में रणनीति बनाई गई कि पार्टी हर निकाय क्षेत्र में एक मजबूत और सर्वसम्मत उम्मीदवार को समर्थन देगी. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बिखराव की बजाय एक उम्मीदवार पर फोकस करने से जीत की संभावना बढ़ेगी.
गैर-दलगत चुनाव, लेकिन सियासी ताकत झोंकने की तैयारी
बीजेपी ने साफ कर दिया है कि भले ही चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन पार्टी संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा. जिस उम्मीदवार को पार्टी समर्थन देगी, उसके लिए संगठन, कार्यकर्ता और संसाधन पूरी तरह लगाए जाएंगे. पार्टी का दावा है कि जमीनी स्तर पर बीजेपी की पकड़ मजबूत है और नगर निकाय चुनाव में इसका सीधा फायदा मिलेगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि गैर-दलगत चुनाव में बीजेपी की यह रणनीति कितना असर दिखा पाती है और सियासी मुकाबला किस दिशा में जाता है.


