देश की नजरें एक बार फिर संसद भवन पर टिकी हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे लोकसभा में मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का एक अहम बजट पेश करेंगी. यह उनका लगातार नौवां केंद्रीय बजट होगा, जिसे आर्थिक चुनौतियों, वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग को रफ्तार देने वाले फैसलों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. महंगाई, टैक्स बोझ और रोजगार को लेकर दबाव झेल रहे मिडिल क्लास को इस बजट से बड़ी राहत की उम्मीद है, वहीं किसान, उद्योग, स्टार्टअप और निवेशक भी सरकार से ठोस ऐलान की आस लगाए बैठे हैं. खास बात यह है कि बजट वाले दिन रविवार होने के बावजूद शेयर बाजार खुले रहेंगे, जिससे बजट के असर का तुरंत आकलन किया जा सकेगा. सवाल यही है—क्या आम बजट 2026 आम आदमी की उम्मीदों पर खरा उतरेगा या सपने फिर अधूरे रह जाएंगे?
क्यों अहम है यह बजट?
आम बजट 2026-27 को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह बजट ऐसे समय आ रहा है जब:
• वैश्विक स्तर पर व्यापार और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है
• महंगाई का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
• सरकार को विकास और राजकोषीय संतुलन के बीच बैलेंस बनाना है
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के मुताबिक FY27 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.8% से 7.2% की दर से बढ़ सकती है. ऐसे में यह बजट सरकार की विकास रणनीति की दिशा तय करेगा.
इनकम टैक्स: मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?
इनकम टैक्स इस बजट का सबसे बड़ा फोकस एरिया माना जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में महंगाई बढ़ने से सैलरीड क्लास की जेब पर सीधा असर पड़ा है.
संभावित ऐलान:
• 30% टैक्स स्लैब की सीमा 24 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये की जा सकती है
• नई टैक्स रिजीम में कुछ जरूरी डिडक्शन शामिल किए जा सकते हैं
• स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने पर भी विचार संभव
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार नई टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाती है, तो ज्यादा टैक्सपेयर्स उसे अपनाने के लिए तैयार होंगे.
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कितना फोकस?
देश की करीब आधी आबादी आज भी कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है. ऐसे में बजट 2026 में कृषि सेक्टर के लिए बड़े ऐलान की उम्मीद की जा रही है.
किसानों की प्रमुख मांगें:
• किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट बढ़ाना
• फसल बीमा योजनाओं को और मजबूत करना
• वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग पर निवेश
सरकार का फोकस उत्पादकता बढ़ाने, डिजिटल एग्रीकल्चर और एग्रीटेक को बढ़ावा देने पर हो सकता है.
रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर: रफ्तार बढ़ेगी या नहीं?
रेलवे बजट अब आम बजट का हिस्सा है, लेकिन इसकी अहमियत कम नहीं हुई है. उम्मीद है कि:
• नई वंदे भारत ट्रेनों की घोषणा हो सकती है
• ट्रेन कवच और सुरक्षा प्रणालियों पर खर्च बढ़ेगा
• रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण पर जोर रहेगा
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सिर्फ नई परियोजनाओं ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर भी फोकस करने की मांग उठ रही है.
डिफेंस सेक्टर: आत्मनिर्भर भारत पर जोर
बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच डिफेंस सेक्टर को लेकर सरकार का रुख साफ है—आत्मनिर्भरता.
संभावित फोकस:
• स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा
• रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश
• डिफेंस स्टार्टअप्स के लिए इंसेंटिव
डिफेंस पर बढ़ा हुआ बजट रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से अहम होगा.
हेल्थ और एजुकेशन: सोशल सेक्टर को कितनी प्राथमिकता?
कोरोना के बाद से हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत और बढ़ गई है.
हेल्थ सेक्टर की मांग:
• यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंस
• प्राइमरी और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर ज्यादा खर्च
• ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में डॉक्टरों को इंसेंटिव
वहीं शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल लर्निंग, स्किल डेवलपमेंट और मेडिकल एजुकेशन पर जोर रहने की उम्मीद है.
शेयर बाजार और निवेशक: बजट से क्या उम्मीद?
बजट 2026 के दिन NSE और BSE खुले रहेंगे, जिससे बाजार की प्रतिक्रिया तुरंत दिखेगी.
निवेशकों की प्रमुख मांगें:
• LTCG टैक्स में राहत
• STT में कटौती या स्थिरता
• कैपिटल गेंस टैक्स में सरलता
अगर बाजार के अनुकूल फैसले आते हैं, तो बजट के बाद शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन इकोनॉमी
भारत के 2030 तक 500 GW क्लीन एनर्जी लक्ष्य को देखते हुए, बजट 2026 में:
• सोलर और ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा
• एनर्जी स्टोरेज और ग्रिड मॉडर्नाइजेशन
• रिन्यूएबल एनर्जी स्किलिंग पर फोकस
इन क्षेत्रों में निवेश से रोजगार और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिल सकती है.
स्टार्टअप और MSME: ग्रोथ को मिलेगा बूस्ट?
स्टार्टअप और MSME सेक्टर बजट से बेहतर फंडिंग एक्सेस और आसान नियमों की उम्मीद कर रहा है.
संभावित कदम:
• MSME लोन गारंटी स्कीम का विस्तार
• स्टार्टअप्स के लिए टैक्स और कंप्लायंस में राहत
• निर्यात को बढ़ावा देने वाले प्रोत्साहन
उम्मीदें ज्यादा, चुनौतियां भी बड़ी
आम बजट 2026 सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की आर्थिक सोच का आईना होगा. मिडिल क्लास को टैक्स राहत, किसानों को समर्थन, उद्योग को रफ्तार और निवेशकों को भरोसा—इन सभी के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. अब सबकी नजर 1 फरवरी सुबह 11 बजे पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि यह बजट उम्मीदों पर खरा उतरता है या फिर सवालों की नई लिस्ट छोड़ जाता है.

