भरत तिवारी एनकाउंटर केस: बिलौटी पहुंचे रिटायर्ड जज, मां ने मांगी फांसी की सजा; न्यायिक जांच ने पकड़ी रफ्तार
भोजपुर के बिलौटी गांव में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित आयोग ने गांव पहुंचकर मृतक के परिजनों से मुलाकात की और घटना से जुड़े साक्ष्य मांगे।

भोजपुर के बिलौटी गांव में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है. घटना के आठ दिन बाद पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग गुरुवार को गांव पहुंचा और मृतक के परिजनों से मुलाकात की. आयोग के साथ शाहाबाद रेंज के डीआईजी सत्य प्रकाश, भोजपुर के डीएम तनय सुल्तानिया, एसपी राज सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे. जांच टीम ने परिवार का पक्ष सुना, घटनास्थल से जुड़ी जानकारी जुटाई और परिजनों से लिखित आवेदन व उपलब्ध साक्ष्य देने को कहा. दूसरी ओर भरत तिवारी की मां आशा देवी ने बेटे की मौत को हत्या बताते हुए दोषियों को फांसी देने, सीबीआई जांच कराने और कथित रूप से संदिग्ध अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग दोहराई. गांव में लोगों की भीड़ जुटी रही और पूरे मामले पर राज्यभर की नजरें टिकी हुई हैं.
न्यायिक जांच आयोग पहली बार पहुंचा बिलौटी
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की जांच के लिए गठित आयोग की यह पहली आधिकारिक गांव यात्रा थी. आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा ने परिजनों से अलग-अलग बातचीत कर उनका पक्ष जाना. आयोग ने घटना से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और स्थानीय लोगों की बातों को भी दर्ज किया. जांच टीम ने संकेत दिया कि परिवार से प्राप्त लिखित आवेदन, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मां बोलीं- बेटे के हत्यारों को फांसी मिले
जांच टीम के सामने भरत तिवारी की मां आशा देवी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि उनके बेटे की जान लेने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उनका कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए और यदि निष्पक्ष जांच होगी तो सच्चाई सामने आ जाएगी. आशा देवी ने फिर से सीबीआई जांच की मांग उठाते हुए कहा कि परिवार का भरोसा न्यायिक प्रक्रिया पर है, लेकिन पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए. उन्होंने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए.
आयोग ने मांगे फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य
न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने परिजनों से जांच में सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े फोटो, वीडियो, मोबाइल रिकॉर्डिंग या अन्य उपलब्ध साक्ष्य आयोग को उपलब्ध कराए जाएं ताकि हर पहलू की गहन जांच की जा सके. आयोग का कहना है कि मामले से जुड़ी हर जानकारी का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और किसी भी तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.
मोबाइल लौटाने और सुरक्षा देने की उठी मांग
जांच के दौरान भरत तिवारी के भाई ने मृतक का मोबाइल फोन वापस दिलाने की मांग उठाई. परिवार का कहना है कि मोबाइल अभी पुलिस के कब्जे में है और उसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां हो सकती हैं. इस पर आयोग अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि इस संबंध में जिला प्रशासन से बात की जाएगी. वहीं परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. परिजनों का कहना है कि घटना के बाद भय और दबाव का माहौल बना हुआ है. आयोग ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे.
एसपी भी पहुंचे, महापंचायत ने दी आंदोलन की चेतावनी
इधर एनकाउंटर के आठ दिन बाद भोजपुर के एसपी राज भी भरत तिवारी के घर पहुंचे और लगभग एक घंटे तक परिजनों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि वे सफाई देने नहीं बल्कि परिवार की पीड़ा सुनने आए हैं तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी. दूसरी ओर बिलौटी गांव में हुई महापंचायत में लोगों ने भरत तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों को पूरा करने की मांग की. पंचायत में चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो श्राद्धकर्म के बाद विधानसभा घेराव सहित बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी.
कैबिनेट की मंजूरी के बाद बनी जांच आयोग
गौरतलब है कि बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच बिहार सरकार ने हाल ही में इस मामले की न्यायिक जांच को मंजूरी दी थी. इसके बाद पूर्व न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया. परिजन लगातार इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं. मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के साथ कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है. अब सबकी निगाहें न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस बहुचर्चित मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद की जा रही है.

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