RIMS में बड़ा प्रशासनिक भूचाल: CID पूछताछ के बाद निदेशक डॉ. राजकुमार ने दिया इस्तीफा
रिम्स में कथित एडमिशन घोटाले और टेंडर अनियमितताओं की सीआईडी जांच के बीच बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। सात घंटे तक चली पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,

Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में चल रही सीआईडी जांच के बीच बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है. रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है. हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संस्थान और स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं. बताया जा रहा है कि सीआईडी की लंबी पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद यह फैसला लिया गया. रिम्स में कथित एडमिशन घोटाले और टेंडर आवंटन में अनियमितताओं की जांच फिलहाल राज्य की सबसे चर्चित जांचों में शामिल है. बुधवार को सीआईडी की दो टीमों ने रिम्स पहुंचकर विभिन्न विभागों में जांच की थी. इसके बाद से ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई थी और निदेशक के इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं, जो अब सच साबित होती दिख रही हैं.
सात घंटे चली जांच, कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त
बुधवार को सीआईडी की दो विशेष टीमों ने रिम्स परिसर में व्यापक जांच अभियान चलाया. जांच के दौरान डेटा सेंटर, डीन कार्यालय और प्रशासनिक शाखा समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की फाइलों और रिकॉर्ड की पड़ताल की गई. इस दौरान निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन, चिकित्सा अधीक्षक सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों से घंटों पूछताछ की गई. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई करीब सात घंटे तक चली, जिसमें जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए. अधिकारियों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं, प्रवेश संबंधी अनुमोदनों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गई. सीआईडी की इस कार्रवाई को जांच का अहम चरण माना जा रहा है. एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन स्तरों पर संभावित अनियमितताएं हुईं.
फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिले का आरोप
सीआईडी की जांच का प्रमुख केंद्र वर्ष 2025 के शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में हुए प्रवेश हैं. शिकायत के अनुसार एमबीबीएस के तीन और बीडीएस के एक छात्र ने कथित रूप से फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिला प्राप्त किया था. जांच एजेंसी अब संबंधित छात्रों के दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रमाण पत्रों का अनिवार्य सत्यापन समय पर क्यों नहीं कराया गया. यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई जाती है तो यह सवाल भी उठेगा कि ऐसे छात्रों को प्रवेश कैसे मिला और वे लगभग एक वर्ष तक बिना किसी आपत्ति के पढ़ाई कैसे करते रहे. सीआईडी इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई.
सफाई टेंडर में अनियमितताओं के आरोप भी जांच के दायरे में
एडमिशन मामले के साथ-साथ रिम्स में सफाई कार्य के लिए जारी किए गए टेंडरों की भी सीआईडी जांच कर रही है. शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई तथा कुछ विशेष कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए निर्णय लिए गए. जांच एजेंसी टेंडर से जुड़े दस्तावेजों, निविदा प्रक्रिया, चयन मानकों और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है. अधिकारियों से यह जानकारी भी मांगी गई है कि संबंधित कंपनियों का चयन किन आधारों पर किया गया था. यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और निर्णय लेने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. माना जा रहा है कि यह मामला भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता तय होगा. स्वास्थ्य विभाग भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है.
पहले भी विवादों में रहे हैं डॉ. राजकुमार
रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार इससे पहले भी अपने पुत्र ऋषभ कुमार की नियुक्ति को लेकर विवादों में घिर चुके हैं. मार्च 2026 में ऋषभ कुमार की रिम्स के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्यूटर पद पर नियुक्ति हुई थी, जिस पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे. आरोप यह था कि जिस पद पर नियुक्ति की गई, उसके लिए राज्य सरकार की ओर से कोई स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं था. इस मामले को लेकर भी जांच शुरू हुई थी और विपक्ष सहित कई संगठनों ने सवाल उठाए थे. हालांकि डॉ. राजकुमार ने उस समय सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि नियुक्ति रिम्स अधिनियम और शासी परिषद को प्राप्त अधिकारों के तहत पूरी तरह नियमसम्मत तरीके से की गई है. अब सीआईडी जांच और इस्तीफे के बाद पुराने विवाद भी फिर चर्चा में आ गए हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है.
अब सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर नजर
डॉ. राजकुमार के इस्तीफे के बाद रिम्स और राज्य के स्वास्थ्य प्रशासन में कई सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सीआईडी जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनके कारण यह फैसला लिया गया, या फिर यह केवल प्रशासनिक और नैतिक जिम्मेदारी के तहत उठाया गया कदम है. फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. वहीं सीआईडी जांच जारी है और एजेंसी दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी. यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो सीआईडी थाना में प्राथमिकी दर्ज कर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पूरे मामले पर अब स्वास्थ्य विभाग, सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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