झारखंड के पीएल खातों में 18,902 करोड़ रुपये पड़े निष्क्रिय, वित्त मंत्री ने कहा- अब वापस होगा पैसा
“झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के पर्सनल लेजर (पीएल) खातों में 18,902 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वर्षों से निष्क्रिय पड़ी है। इस पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नाराजगी जताते हुए सभी विभागों को राशि राजकोष में वापस जमा कराने का निर्देश दिया है”

रांची: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के पर्सनल लेजर (पीएल) खातों में 18,902 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वर्षों से निष्क्रिय पड़ी है। इस पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नाराजगी जताते हुए सभी विभागों को राशि राजकोष में वापस जमा कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि विभाग तय समय के भीतर पैसा वापस नहीं करते हैं तो वित्त विभाग इसे स्वतः प्रत्यर्पित मानकर आवश्यक कार्रवाई करेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार मंईयां सम्मान योजना समेत कई जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों करोड़ रुपये पीएल खातों में निष्क्रिय पड़े रहना वित्तीय प्रबंधन की गंभीर खामी को दर्शाता है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताते हुए कहा कि इस पैसे का बेहतर उपयोग राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है।
किन विभागों में सबसे ज्यादा राशि?
31 मई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक नगर विकास विभाग के पीएल खाते में 2,876 करोड़ रुपये जमा हैं। वहीं ऊर्जा विभाग के खाते में 3,943 करोड़ रुपये, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में 1,957 करोड़ रुपये, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में 1,922 करोड़ रुपये तथा भवन निर्माण विभाग में 1,776 करोड़ रुपये पड़े हुए हैं। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक विभागों के खातों में भी बड़ी राशि जमा है।
हैरानी की बात यह है कि कई विभागों के पास यह स्पष्ट जानकारी तक नहीं है कि यह रकम कब से पीएल खातों में पड़ी हुई है।
चार साल से अधिक पुरानी राशि होगी वापस
वित्त मंत्री ने वित्त सचिव को निर्देश दिया है कि चालू वित्तीय वर्ष और पिछले तीन वर्षों तक की राशि का री-वैलिडेशन केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाए। वहीं चार वर्ष से अधिक समय से पीएल खातों में पड़ी राशि को हर हाल में राजकोष में वापस जमा कराने के लिए सभी विभागीय सचिवों को निर्देश जारी किए जाएं।
वित्तीय अनुशासन पर उठे सवाल
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकारी धन को लंबे समय तक पीएल खातों में रखना निर्धारित वित्तीय मानकों और स्वस्थ वित्तीय प्रबंधन के खिलाफ है। यह वित्तीय अनुशासनहीनता का संकेत भी है। उन्होंने कहा कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए एफआरबीएम कानून के तहत राज्य के कर्ज लेने की सीमा तय होती है। ऐसे में पीएल खातों में बड़ी राशि निष्क्रिय पड़े रहने से राज्य की वित्तीय स्थिति और उधारी की सीमा पर भी असर पड़ता है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब इन खातों की व्यापक समीक्षा की जाएगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।


