संस्कारों से बनेगा सशक्त भारत, महापौर रवि कुमार राउत ने किया पुस्तक का विमोचन
देवघर के महापौर रवि कुमार राउत ने ‘श्रेष्ठ भारत के पुनर्निर्माण में संस्कार की भूमिका’ पुस्तक का विमोचन किया. प्रो. डॉ. ओमप्रकाश चौधरी और आचार्य प्रवर निरंजन की संयुक्त रचना में संस्कार, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के महत्व को रेखांकित किया गया है.

देवघर:- क्या किसी देश की ताकत सिर्फ उसकी आर्थिक तरक्की, बड़ी इमारतों और आधुनिक सुविधाओं से तय होती है? या फिर उस समाज के संस्कार, नैतिक मूल्य और नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है? देवघर नगर निगम कार्यालय परिसर में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में इसी सवाल पर चर्चा हुई. सोमवार को महापौर रवि कुमार राउत ने प्रो. डॉ. ओमप्रकाश चौधरी और आचार्य प्रवर निरंजन की संयुक्त रचना ‘श्रेष्ठ भारत के पुनर्निर्माण में संस्कार की भूमिका’ का विमोचन किया. कार्यक्रम में महापौर ने कहा कि मजबूत राष्ट्र की नींव केवल विकास से नहीं, बल्कि संस्कार और नैतिक चेतना से भी तैयार होती है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और जिम्मेदारियों से जोड़ना जरूरी है. इस दिशा में ऐसी पुस्तकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, जो युवाओं को बेहतर नागरिक बनने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझने के लिए प्रेरित करें.
राष्ट्र निर्माण में संस्कारों की भूमिका पर जोर
पुस्तक विमोचन के दौरान महापौर रवि कुमार राउत ने कहा कि किसी भी देश की पहचान सिर्फ उसकी आर्थिक स्थिति या भौतिक उपलब्धियों से नहीं होती. समाज की संस्कृति, नैतिक सोच और आपसी जिम्मेदारी भी राष्ट्र की मजबूती तय करती है. उनके मुताबिक, अगर नागरिक अपने कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें, तो विकास का लाभ व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ और समर्थ भारत की कल्पना को साकार करने में संस्कारों की भूमिका बेहद अहम है. खासकर ऐसे समय में जब युवा पीढ़ी तेजी से बदलती जीवनशैली और नई चुनौतियों के बीच आगे बढ़ रही है, तब उसे अपने मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना जरूरी है.
युवाओं और अभिभावकों के लिए उपयोगी होने की उम्मीद
महापौर ने पुस्तक के दोनों लेखकों के प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि प्रो. डॉ. ओमप्रकाश चौधरी और आचार्य प्रवर निरंजन ने संस्कार और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को केंद्र में रखते हुए अपने विचारों को पुस्तक का रूप दिया है. उनका मानना है कि यह कृति केवल सामान्य पाठकों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, अभिभावकों और युवाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. नई पीढ़ी के चरित्र निर्माण में परिवार और शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता पर केंद्रित सामग्री युवाओं को अपने फैसलों और सामाजिक व्यवहार को लेकर सोचने का अवसर दे सकती है.
शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन भी जरूरी
पुस्तक के लेखक प्रो. डॉ. ओमप्रकाश चौधरी ने कार्यक्रम के दौरान इसकी विषयवस्तु पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किताब के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों में नैतिक चेतना को बढ़ाने और संस्कारयुक्त नागरिकों के निर्माण पर विचार रखने का प्रयास किया गया है. उनके अनुसार, किसी भी देश के बेहतर भविष्य के लिए सिर्फ शिक्षा पर्याप्त नहीं है. शिक्षा के साथ अनुशासन, कर्तव्यबोध, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे पहलुओं को भी महत्व देना होगा. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझता है, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत जमीन तैयार होती है.
पुस्तक में सामाजिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण पर मंथन
‘श्रेष्ठ भारत के पुनर्निर्माण में संस्कार की भूमिका’ पुस्तक का केंद्रीय विषय संस्कार, नैतिक मूल्य और राष्ट्र निर्माण के बीच संबंध को समझने की कोशिश है. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इन विषयों को मौजूदा दौर के लिए महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना था कि बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार, शिक्षा और समाज के स्तर पर नैतिक मूल्यों को लेकर लगातार संवाद की जरूरत है. पुस्तक इसी चर्चा को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकती है. खासकर युवाओं के बीच राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए ऐसे विषयों पर बातचीत जरूरी है.
कार्यक्रम में कई लोग रहे मौजूद
पुस्तक विमोचन समारोह में देवघर नगर निगम के पार्षद मृत्युंजय राउत, पूर्व पार्षद आशीष पंडित समेत सामाजिक कार्यकर्ता और कई प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे. उपस्थित लोगों ने पुस्तक के विषय को उपयोगी बताते हुए कहा कि संस्कार और नैतिकता जैसे मुद्दों पर समाज में लगातार चर्चा होनी चाहिए. कार्यक्रम के दौरान पुस्तक के लेखकों के प्रयास की भी सराहना की गई. समारोह में राष्ट्र निर्माण, युवा पीढ़ी और सामाजिक मूल्यों से जुड़े विचारों पर चर्चा हुई. अंत में उपस्थित लोगों ने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक पाठकों को अपने व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज और देश के प्रति जिम्मेदारियों पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगी.


