सिमडेगा में 10 साल की बच्ची को रूबेला, झारखंड में सामने आया पहला मामला; स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
“झारखंड में रूबेला संक्रमण का पहला मामला सिमडेगा जिले में सामने आया है. ठेठईटांगर की 10 वर्षीय बच्ची में संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक्टिव केस सर्च, निगरानी और विशेष एमआर टीकाकरण अभियान शुरू किया है.”

झारखंड में रूबेला संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाके में निगरानी और टीकाकरण गतिविधियां बढ़ा दी हैं. सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के मुंडाटोली में 10 वर्षीय बच्ची के रूबेला से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. बच्ची के रक्त नमूने की जांच रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में की गई थी. रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय स्तर पर संक्रमण की स्थिति का पता लगाने के लिए एक्टिव केस सर्च शुरू कर दिया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड की ओर से मामले की निगरानी के लिए राज्यस्तरीय वॉर रूम भी बनाया गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में संदिग्ध मामलों की पहचान, उनकी निगरानी और टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की जा रही है. इसी क्रम में मुंडाटोली में बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित करने की तैयारी है.
जांच के बाद हुई रूबेला संक्रमण की पुष्टि
ठेठईटांगर के मुंडाटोली में रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची के ब्लड सैंपल की जांच रिम्स में कराई गई. जांच रिपोर्ट में रूबेला संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के साथ संभावित मरीजों की तलाश शुरू कर दी है. स्वास्थ्य संस्थानों को मामलों की जानकारी अपडेट रखने के निर्देश भी दिए गए हैं.
झारखंड के कुछ जिलों में खसरे के मामले
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राज्य में खसरे के करीब 15 मरीज भी सामने आए हैं. इनमें पूर्वी सिंहभूम, पाकुड़ और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़े कुछ अन्य जिलों के मामले बताए गए हैं. विभाग इन इलाकों में संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर सामने आए खसरे के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं.
9 महीने से 5 साल तक के बच्चों पर फोकस
रूबेला का मामला सामने आने के बाद मुंडाटोली क्षेत्र में विशेष टीकाकरण अभियान चलाने की तैयारी है. इसके तहत 9 महीने से 5 वर्ष तक के बच्चों की पहचान कर उनके एमआर टीकाकरण की स्थिति देखी जाएगी. जिन बच्चों की दूसरी डोज बाकी है, उन्हें निर्धारित टीका दिया जाएगा. वहीं, जिन बच्चों को अब तक वैक्सीन की डोज नहीं मिली है, उनका टीकाकरण सरकारी कार्यक्रम के नियमों के अनुसार किया जाएगा.
राज्य स्तर पर बनाया गया वॉर रूम
मामले की निगरानी और विभागीय समन्वय के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड में राज्यस्तरीय वॉर रूम बनाया गया है. राज्य टीकाकरण पदाधिकारी के अनुसार एमआर टीकाकरण की मॉनिटरिंग को और मजबूत किया जा रहा है. प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य कर्मियों को एक्टिव केस खोजने और संदिग्ध मामलों की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं.
गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों चिंता का विषय है रूबेला?
रूबेला संक्रमण गर्भावस्था के दौरान विशेष चिंता का कारण बन सकता है. गर्भवती महिला के संक्रमित होने पर गर्भस्थ शिशु में जन्मजात रूबेला सिंड्रोम का खतरा रहता है. इससे बच्चे की सुनने की क्षमता और आंखों समेत कई अंगों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में रूबेला से बचाव के लिए टीकाकरण और संक्रमण की समय पर पहचान को महत्वपूर्ण माना जाता है. स्वास्थ्य विभाग ने भी प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण और निगरानी गतिविधियों को तेज किया है.


