क्या जेएमएम अंजनी सोरेन को भेजेगा राज्यसभा? CM हेमंत सोरेन पर तेज दबाव
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर झामुमो के भीतर सियासी हलचल तेज है. शिबू सोरेन के निधन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की मांग है कि उनकी बेटी अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजा जाए. पार्टी के भीतर इसे सम्मान, संगठन और राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है.

इस साल झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं और राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज़्यादा चर्चा है—क्या जेएमएम शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजेगा? पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सूत्रों के मुताबिक, अंजनी सोरेन की दावेदारी अब पार्टी के एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है. पार्टी में यह भी माना जाता है कि शिबू सोरेन के निधन के बाद पार्टी की पारंपरिक पहचान संसद में कम दिखाई देती रही है, और इस बार इस कमी को पूरा करने का मौका है. जाहिर है कि जेएमएम के पास इस बार दोनों राज्यसभा सीटें जीतने का अवसर है क्योंकि इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायकों की मजबूत संख्या है—जिससे 27+1 के आंकड़े को पार कर दो सीटों पर विजय पाना आसान हो सकता है. इस राजनीतिक परिस्थिति में पार्टी कार्यकर्ता और नेताओं की मांग है कि अंजनी को उम्मीदवार बनाया जाए.
क्यों जोर शोर से उठ रहा नाम?
पार्टी नेताओं का कहना है कि अंजनी सोरेन सिर्फ शिबू सोरेन की बेटी नहीं हैं, बल्कि एक सक्रिय राजनीतिक चेहरे के रूप में जेएमएम की पहचान भी हैं. अंजनी ने ओडिशा में संगठन को मजबूत किया है और पार्टी के लिए कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया है. इससे न सिर्फ जेएमएम कार्यकर्ताओं में जोश आएगा, बल्कि ओडिशा में पार्टी के संगठन को भी मजबूती मिल सकती है. स्थानीय और जिला नेतृत्व भी उनके समर्थन में हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है, तो पार्टी की व्यापक संदेश क्षमता में विस्तार होगा.
हेमंत सोरेन की भूमिका
कार्यकर्ता और नेताओं की मांग स्पष्ट है, लेकिन अंतिम फैसला जेएमएम केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर होगा. पार्टी के सेंट्रल कमिटी और जेएमएम नेतृत्व में अभी भी चर्चाएँ जारी हैं कि किस तरह की टिकटिंग रणनीति अपनाई जाए, विशेषकर बिहार और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में पार्टी की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए. अंजनी सोरेन के अलावा पार्टी के पास अन्य वरिष्ठ नेता भी हैं जिनके नाम राज्यसभा की दावेदारी को सुदृढ़ कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, पार्टी की वर्तमान राज्यसभा सदस्य महुआ माजी को पिछले राज्यसभा चुनाव में टिकट मिला था और उन्होंने महिला आयोग जैसे पदों पर नेतृत्व किया है. इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अनुभव और सामंजस्य के आधार पर भी चुनावी लाइन-अप तय कर सकती है.
चुनावी रणनीति और राजनीतिक मायने
राज्यसभा की दावेदारी इस बार सिर्फ एक सीट भर भरने जैसा नहीं है. यह झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में जेएमएम की पहचान, संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व परंपरा से जुड़ा मुद्दा बन चुका है. अंजनी सोरेन का नाम पारंपरिक और नयी पीढ़ी दोनों के लिए आकर्षक प्रतीक बन चुका है—क्योंकि वे न सिर्फ शिबू सोरेन की विरासत को आगे ले जाती हैं, बल्कि ओडिशा में सक्रिय राजनीति और संगठनात्मक फैसलों में भी भूमिका निभा चुकी हैं. जबकि यह तय है कि पार्टी नेतृत्व फैसले में निर्णायक भूमिका निभाएगा, इस पर कहीं बाहर यह भी स्पष्ट है कि इस मुद्दे ने झारखंड राजनीति में नेताओं, कार्यकर्ताओं और गठबंधन सहयोगियों के बीच व्यापक बहस छेड़ी है, जिससे राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और रणनीतिक समीकरण दोनों पर प्रभाव पड़ेगा.

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