10 रुपये एक्साइज ड्यूटी घटने के बाद भी नहीं घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? सरकार का बड़ा बयान
वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं

New Delhi : वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, जिससे तेल आयात करने वाले देशों, खासकर भारत पर दबाव बढ़ गया है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल की लागत को प्रभावित करती है. इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में संभावित बाधाओं के कारण वैकल्पिक रास्तों से तेल आयात करना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत भी बढ़ गई है. इस पूरी स्थिति ने तेल कंपनियों के सामने लागत का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की घोषणा की है. पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है. आमतौर पर जब सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करती है, तो इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलता है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिलती है. हालांकि इस बार स्थिति अलग है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह कटौती तेल कंपनियों को राहत देने के लिए की गई है ताकि वे बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रख सकें. यानी इस फैसले का उद्देश्य कीमतों को घटाना नहीं, बल्कि उन्हें बढ़ने से रोकना है.
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम उपभोक्ताओं को महंगाई के झटके से बचाने के लिए उठाया गया है. अगर एक्साइज ड्यूटी में यह कटौती नहीं की जाती, तो तेल कंपनियों को बढ़ी हुई लागत का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालना पड़ता, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती थी. इसके साथ ही सरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क भी लगाया है, ताकि घरेलू बाजार में इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके. यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दे रही है और कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है.
पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि देखी गई है और कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं. ऐसे में भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप घरेलू कीमतें बढ़ा दी जाएं, या फिर खुद राजस्व का बोझ उठाकर आम जनता को राहत दी जाए. सरकार ने दूसरा विकल्प चुना, जिससे नागरिकों को तत्काल राहत मिल सके. वर्तमान में देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जो इस बात का संकेत है कि सरकार की रणनीति फिलहाल प्रभावी साबित हो रही है. कुल मिलाकर, एक्साइज ड्यूटी में कटौती का यह कदम भले ही सीधे तौर पर कीमतों में कमी न लाए, लेकिन यह आम लोगों को बढ़ती महंगाई से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक उपाय है.

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