झारखंड में 631 डॉक्टर कहां गायब हो गए? नौकरी पर आए, अस्पताल नहीं पहुंचे! अब सेवामुक्त करने की तैयारी
झारखंड में 631 डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के रडार पर हैं. नियुक्ति के बाद योगदान नहीं देने या लंबे समय से कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने के मामलों की समीक्षा की जा रही है. इनमें 2009 बैच के 308 और 2015 बैच के 124 डॉक्टर शामिल हैं. विभाग नियमानुसार सेवामुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है.

Ranchi: सरकारी नौकरी मिली, डॉक्टर के पद पर नियुक्ति हुई, लेकिन मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी निभाने के लिए कार्यस्थल पर पहुंचे या नहीं, यही अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है. झारखंड में ऐसे 631 डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के रडार पर हैं, जिनके बारे में विभागीय स्तर पर जानकारी मिली है कि उन्होंने नियुक्ति के बाद योगदान नहीं दिया या लंबे समय से अपने निर्धारित कार्यस्थल से अनुपस्थित हैं. अब स्वास्थ्य विभाग इन मामलों की समीक्षा कर रहा है और नियमानुसार सेवामुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन मामलों में 2009 में नियुक्त 308 डॉक्टर और 2015 में नियुक्त 124 डॉक्टर शामिल हैं.
1990 बैच के 2 डॉक्टर, 2000 के 7 भी सूची में
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिह्नित 631 डॉक्टरों की नियुक्ति अलग-अलग वर्षों में हुई थी. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2009 में नियुक्त 308 और 2015 में नियुक्त 124 डॉक्टर इस सूची में हैं. इसके अलावा 2012 के 65, 2013 के 38, 2020 के 37, 2021 के 17 और 2023 के 16 डॉक्टर चिह्नित किए गए हैं. वर्ष 1990 के दो और 2000 के सात डॉक्टर भी सूची में शामिल हैं. विभाग अब इन मामलों की समीक्षा कर रहा है.
नियुक्ति के बाद योगदान नहीं
विभागीय जानकारी के अनुसार, इन डॉक्टरों में ऐसे लोग शामिल हैं जिन्होंने नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं दिया या लंबे समय से अनुपस्थित हैं. स्वास्थ्य विभाग नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है. हालांकि, सभी 631 मामलों में अनुपस्थिति की अवधि और व्यक्तिगत परिस्थितियों का अंतिम विवरण सामने आना बाकी है. ऐसे में सेवामुक्ति की कार्रवाई संबंधित नियमों और मामले की समीक्षा के आधार पर होगी.
पहले भी 143 डॉक्टरों पर हो चुकी है कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड में नियुक्ति के बाद योगदान नहीं देने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई हो. वर्ष 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा समाप्त की गई थी. इन डॉक्टरों ने नियुक्ति के बाद योगदान नहीं दिया था. अब 631 नए मामलों को चिह्नित किए जाने से स्वास्थ्य विभाग के सामने लंबित मामलों के निपटारे की चुनौती और बड़ी हो गई है.
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के पीछे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी प्रमुख उद्देश्य है. विभाग रिक्त पदों पर झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से नए डॉक्टरों की नियुक्ति की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. इससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद है. हालांकि, नई नियुक्तियों की प्रक्रिया और डॉक्टरों की तैनाती में कितना समय लगेगा, इस पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.

