VIDEO: 2 मिनट लेट... सपने खत्म! NEET या निर्दयी सिस्टम? कहीं मां पैरों में गिरी, कहीं पिता बेहोश, पूरे देश को रुला गईं ये तस्वीरें
महज 2 मिनट... सिर्फ 120 सेकेंड. लेकिन इन 120 सेकेंड ने देशभर के कई छात्रों के सपने तोड़ दिए. कहीं मां सुरक्षा गार्डों के पैरों में गिरकर बेटी को परीक्षा में बैठाने की गुहार लगाती रही, कहीं पिता अपनी बेटी का टूटता सपना देखकर बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा.

महज 2 मिनट... सिर्फ 120 सेकेंड. लेकिन इन 120 सेकेंड ने देशभर के कई छात्रों के सपने तोड़ दिए. कहीं मां सुरक्षा गार्डों के पैरों में गिरकर बेटी को परीक्षा में बैठाने की गुहार लगाती रही, कहीं पिता अपनी बेटी का टूटता सपना देखकर बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा. कहीं छात्राएं परीक्षा केंद्र के बाहर फूट-फूटकर रोती रहीं तो कहीं मजदूर पिता हाथ जोड़कर अधिकारियों से रहम की भीख मांगता रहा. NEET UG री-एग्जाम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आई ये तस्वीरें सिर्फ कुछ परिवारों का दर्द नहीं हैं, बल्कि उस सिस्टम पर बड़ा सवाल हैं जो पेपर लीक रोकने में नाकाम रहा, लेकिन 1-2 मिनट लेट पहुंचे छात्रों के लिए जरा भी नरमी नहीं दिखा सका. सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि इंसानियत और संवेदनशीलता का भी है.
विदिशा: बेटी का सपना टूटा, पिता जमीन पर बेहोश हो गया
मध्य प्रदेश के विदिशा की छात्रा रागिनी विश्वकर्मा की तस्वीरों ने पूरे देश को भावुक कर दिया. रागिनी 70 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र पहुंच रही थीं. रास्ते में बाइक पंक्चर हो गई और फिर बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दीं. पंक्चर बनवाने और जरूरी कागजात बचाने में कुछ मिनट लग गए. रागिनी और उनके मजदूर पिता किसी तरह परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन वे 2 मिनट देर से पहुंचे थे. नियमों के मुताबिक गेट बंद हो चुका था. पिता अधिकारियों से हाथ जोड़कर गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. कुछ देर बाद बेटी का टूटता सपना देखकर पिता बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं.
तेलंगाना: मां पैरों में गिर गई, फिर भी नहीं खुला गेट
तेलंगाना के जगित्याल जिले से सामने आई तस्वीर ने लोगों को झकझोर दिया. एक मां अपनी बेटी को परीक्षा में शामिल कराने के लिए सुरक्षा गार्डों के पैरों में गिरकर रोती-बिलखती रही. लेकिन नियमों का हवाला देते हुए बेटी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया. मेदचल जिले के कीसरा में भी एक पिता अपनी बेटी के लिए पुलिसकर्मियों के पैरों में गिर पड़ा. पिता का कहना था कि गूगल मैप ने गलत रास्ता दिखा दिया, जिसकी वजह से वे 2 मिनट देर से पहुंचे. लेकिन अधिकारियों ने नियमों में कोई ढील नहीं दी.
बेंगलुरु: कांग्रेस रैली का जाम और तीन बेटियों के टूटे सपने
बेंगलुरु में तीन छात्राएं परीक्षा केंद्र पर सिर्फ 1-2 मिनट देर से पहुंचीं. उनके परिजनों का आरोप है कि वे समय पर घर से निकले थे, लेकिन पैलेस ग्राउंड्स के आसपास कांग्रेस की रैली के कारण भारी ट्रैफिक जाम लग गया. घंटों तक जाम में फंसे रहने के बाद जब वे परीक्षा केंद्र पहुंचे तो गेट बंद हो चुका था. छात्राएं बाहर बैठकर रोती रहीं. माता-पिता अधिकारियों से अनुरोध करते रहे, लेकिन नियमों के आगे उनकी एक नहीं चली.
हैदराबाद: कुछ मिनट की देरी और बंद हो गया भविष्य का दरवाजा
हैदराबाद के KPHB स्थित JNTU परीक्षा केंद्र पर भी दो छात्राओं को कुछ मिनट की देरी के कारण प्रवेश नहीं मिला. छात्राएं लगातार अधिकारियों से अनुरोध करती रहीं, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया. यह पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा में इस तरह की घटनाएं सामने आई हों. लेकिन इस बार दर्द इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह री-एग्जाम था, जो खुद पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की विफलता के कारण आयोजित कराया गया.
पेपर लीक पर नरमी, छात्रों पर इतनी सख्ती क्यों?
देशभर में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस सिस्टम ने पेपर लीक रोकने में लापरवाही दिखाई, क्या वही सिस्टम छात्रों के लिए इतना कठोर हो सकता है कि 1 या 2 मिनट की देरी पर उनके महीनों की मेहनत खत्म कर दे? नियम जरूरी हैं, क्योंकि लाखों छात्रों के बीच निष्पक्षता बनाए रखना आसान नहीं होता. लेकिन क्या किसी असाधारण परिस्थिति में थोड़ी मानवीय संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा सकती? क्या ट्रैफिक जाम, बारिश, गलत रूट या सड़क दुर्घटना जैसी परिस्थितियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?
NEET या निर्दयी सिस्टम?
इन तस्वीरों ने देश को दो हिस्सों में बांट दिया है. एक पक्ष कहता है कि नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि नियमों के साथ इंसानियत भी जरूरी है. लेकिन एक बात तय है... परीक्षा केंद्र के बाहर रोती वह बेटी, पैरों में गिरी वह मां और जमीन पर बेहोश पड़ा वह पिता सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं हैं. वे उस दर्द की तस्वीर हैं, जिसने पूरे देश को रुला दिया. महज 2 मिनट की देरी ने कुछ बच्चों से एक परीक्षा नहीं छीनी, बल्कि उनके सपनों, उनके आत्मविश्वास और उनके परिवार की उम्मीदों को गहरी चोट पहुंचाई है. और शायद इसी वजह से आज देश पूछ रहा है—क्या NEET सिर्फ एक परीक्षा है, या फिर एक ऐसा सिस्टम, जिसमें इंसानियत के लिए कोई जगह नहीं बची?

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