E20 पेट्रोल पर नया विवाद! अब पेट्रोल पंप मालिकों ने उठाए सवाल, बारिश में बढ़ रहा बड़ा खतरा
E20 पेट्रोल पर अब पेट्रोल पंप मालिकों ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि बारिश के मौसम में पानी की मिलावट और फेज़ सेपरेशन जैसी समस्याएं वाहन चालकों और डीलरों दोनों के लिए चुनौती बन सकती हैं.

E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर अब नई बहस छिड़ गई है. इस बार सवाल कार कंपनियों या ग्राहकों ने नहीं, बल्कि पेट्रोल पंप मालिकों ने उठाए हैं. उनका कहना है कि एथेनॉल की पानी सोखने की क्षमता (Hygroscopic Nature) मॉनसून और तटीय इलाकों में बड़ी परेशानी बन रही है. उनका दावा है कि मौजूदा अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक पारंपरिक पेट्रोल के लिए बनाए गए थे, E20 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल के लिए नहीं.
बारिश में टैंक के अंदर क्या हो रहा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारिश का पानी, नमी या टैंकर के जरिए आई थोड़ी-सी नमी भी E20 पेट्रोल के लिए परेशानी बन सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि टैंक में पानी की मात्रा तय सीमा से अधिक हो जाए, तो एथेनॉल पानी के साथ मिलकर नीचे बैठ जाता है और ऊपर पेट्रोल की अलग परत बन जाती है। इस प्रक्रिया को 'फेज़ सेपरेशन' कहा जाता है. समस्या यह है कि पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग यूनिट टैंक के निचले हिस्से से ईंधन खींचती है. ऐसे में कुछ मामलों में वाहन में पेट्रोल की जगह पानी और एथेनॉल का मिश्रण पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है. पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि इससे गाड़ियां स्टार्ट न होने या कुछ दूरी चलने के बाद बंद होने जैसी शिकायतें सामने आ सकती हैं.
टैंक में जंग, खराब होता फ्यूल और बढ़ता नुकसान
पंप संचालकों का कहना है कि एथेनॉल की वजह से स्टील के अंडरग्राउंड टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने की आशंका भी बढ़ जाती है. हालांकि तेल कंपनियों ने E20 के लिए कई उपकरणों को अपग्रेड किया है, लेकिन पानी की मिलावट की चुनौती अब भी बनी हुई है. इसी वजह से डीलरों को दिन में कई बार टैंक की जांच करनी पड़ती है. मॉनसून के दौरान यह जांच और भी ज्यादा बढ़ जाती है. कुछ पंप मालिकों का दावा है कि उन्हें सैकड़ों लीटर से लेकर हजारों लीटर तक फ्यूल खराब होने का नुकसान उठाना पड़ा है. ऐसे खराब फ्यूल के सुरक्षित निपटान को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट दिशानिर्देश मांगे हैं.
इंडियन ऑयल का जवाब- 'मिलावट पर जीरो टॉलरेंस'
इन चिंताओं के बीच इंडियन ऑयल ने साफ कहा है कि फ्यूल क्वालिटी को लेकर उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है. कंपनी के मुताबिक रिटेल आउटलेट्स पर नियमित जांच, अचानक निरीक्षण और वैज्ञानिक परीक्षण किए जा रहे हैं. हाल ही में हजारों क्वालिटी टेस्ट और विशेष निरीक्षण अभियान भी चलाए गए हैं ताकि ग्राहकों तक सही गुणवत्ता का ईंधन पहुंचे. फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है. एक तरफ सरकार एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप मालिक स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर और मॉनसून के दौरान आने वाली तकनीकी चुनौतियों पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं.

