राजीव रंजन मिश्रा केस में बीजेपी बैकफुट पर थी? 4 दिन बाद क्यों बदला स्टैंड
मॉनिटर लिजार्ड के कथित अंगों की बरामदगी और बीजेपी नेता राजीव रंजन मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद अब मामला सिर्फ वन्यजीव तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है.

Ranchi: मॉनिटर लिजार्ड के कथित अंगों की बरामदगी और बीजेपी नेता राजीव रंजन मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद अब मामला सिर्फ वन्यजीव तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है. गिरफ्तारी के बाद शुरुआती दिनों में बीजेपी की ओर से कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, जबकि कांग्रेस नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के कुछ पत्रकारों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए. अब करीब चार दिन बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राजीव रंजन मिश्रा के परिवार से मुलाकात कर मामले को “साजिश” बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर पार्टी को शुरुआत से ही कार्रवाई पर संदेह था, तो बीजेपी की प्रतिक्रिया आने में इतना समय क्यों लगा?
क्या है पूरा मामला
रांची में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान बीजेपी नेता राजीव रंजन मिश्रा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. आरोप है कि इनके पास से मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के करीब 30 कथित अंग बरामद किए गए, जिसके बाद वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज हुआ और तीनों को जेल भेज दिया गया. राजीव रंजन मिश्रा झारखंड की राजनीति में जाना-पहचाना नाम रहे हैं. वे एक समय में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi के करीबी माने जाते रहे हैं और पुराने दौर में झारखंड विकास मोर्चा (JVM) से भी जुड़े रहे. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी.
गिरफ्तारी के बाद विपक्ष बोला, लेकिन बीजेपी रही खामोश
मामले में दिलचस्प पहलू यह रहा कि गिरफ्तारी के बाद कुछ कांग्रेस नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए. कई लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की. हालांकि शुरुआती दिनों में बीजेपी की ओर से कोई बड़ा सार्वजनिक विरोध या बयान सामने नहीं आया. यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी पहले मामले से दूरी बनाकर चल रही थी? या फिर बीजेपी पहले पूरे केस को समझना चाहती थी? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में दल अक्सर शुरुआती चरण में सतर्क रुख अपनाते हैं.
चार दिन बाद बदला रुख, परिवार से मिले प्रदेश अध्यक्ष
मंगलवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू राजीव रंजन मिश्रा के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि राजीव रंजन मिश्रा को “साजिश के तहत फंसाया गया” है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने जल्द रिहाई की मांग भी उठाई. प्रदेश अध्यक्ष के साथ बीजेपी के अन्य नेता भी मौजूद रहे. इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अब पार्टी खुलकर इस मामले में सक्रिय भूमिका लेने जा रही है.
बीजेपी पहले चुप क्यों थी?
राजनीतिक बहस अब इसी मुद्दे पर केंद्रित है. यदि बीजेपी को लगता है कि उनके नेता को फंसाया गया है, तो फिर शुरुआती दिनों में पार्टी की ओर से आक्रामक प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? और अगर उस समय पर्याप्त तथ्य उपलब्ध नहीं थे, तो अब “साजिश” का दावा किस आधार पर किया जा रहा है? फिलहाल दो बातें साथ-साथ चल रही हैं— एक तरफ वन विभाग की कानूनी कार्रवाई और दूसरी तरफ गिरफ्तारी के बाद तेज होती राजनीतिक प्रतिक्रिया. आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ वन्यजीव तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीजेपी की रणनीति, विपक्ष के सवाल और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर भी बहस बढ़ सकती है.

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