नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर सस्पेंस खत्म, एक्स पर दिया बड़ा बयान
नरवणे ने अपनी अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर पहली बार सार्वजनिक बयान दिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के बयान का हवाला देते हुए किताब की मौजूदा स्थिति स्पष्ट की, जिससे इसके प्रकाशन को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है.

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर जारी विवाद में सोमवार को पहली बार सार्वजनिक बयान दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर प्रेस विज्ञप्ति के रूप में अपनी किताब की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि “जैसा प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बताया है, वही सत्य है और कोई भी प्रकाशित प्रति अभी उपलब्ध नहीं है.“ नरवणे का बयान उसी दिन आया जब किताब को लेकर मीडिया में चल रही अटकलें, अनधिकृत प्रतियों के ऑनलाइन प्रसार और संसद में राजनीतिक बहस तेज हो गई थी. प्रचारित विवाद के बीच उन्होंने प्रकाशक के बयान का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि किताब की मौजूदा स्थिति वही है जो पेंगुइन इंडिया ने हाल ही में घोषित किया है.
प्रकाशक का स्पष्ट बयान: ‘किताब प्रकाशित नहीं हुई’
प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने विवाद के बीच स्पष्टीकरण जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि वे इस पुस्तक के एकमात्र प्रकाशक हैं और पुस्तक कभी भी प्रकाशित नहीं हुई है — न प्रिंट, न डिजिटल रूप में.
पेंगुइन ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि:
• ‘Four Stars of Destiny’ अब तक कभी भी बिक्री या वितरण के लिए उपलब्ध नहीं हुई है.
• कोई भी प्रतियाँ, चाहे प्रिंट हो, पीडीएफ हो या कोई अन्य प्रारूप, यदि ऑनलाइन या ऑफ़लाइन उपलब्ध हैं, तो वे अनधिकृत हैं और कॉपीराइट उल्लंघन का मामला हैं.
• पेंगुइन ने चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी अनधिकृत वितरण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
प्रकाशक ने यह भी बताया कि सिर्फ़ प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होना इसका मतलब यह नहीं है कि यह पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है; किताब तभी प्रकाशित मानी जाएगी जब इसे रिटेल चैनल पर खरीद के लिए उपलब्ध कराया जाये.
दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
इस पुस्तक को लेकर दिल्ली पुलिस ने भी मामले में FIR दर्ज की है, जिसमें अनधिकृत प्रतियों के प्रसार संबंधी प्रारंभिक जांच शुरू हो गई है. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक प्रकार का पीडीएफ/टाइपसेट संस्करण साझा किया गया था, जिसके कारण यह मामला उत्पन्न हुआ है और विशेष सेल ने इसकी जांच शुरू कर दी है. विवाद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में लब्बोलुआब संबोधन के दौरान कथित रूप से किताब की प्रति का हवाला दिया, जिससे सदन में तीखी बहस और दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई.
राजनीतिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य
पुस्तक ‘Four Stars of Destiny’ का शीर्षक विशेष रूप से चर्चा में आया है क्योंकि यह पूर्व सेना प्रमुख के अनुभवों और करियर के बारे में बताती है, जिनमें भारत-चीन सीमा तनाव, सैन्य नेतृत्व और विभिन्न रणनीतिक फैसले शामिल हैं. हालाँकि प्रकाशक और नरवणे दोनों ने स्पष्ट किया है कि यह पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, राजनीतिक बयानबाज़ी और अफवाहें इस विवाद को राष्ट्रीय बहस का विषय बना रही हैं.

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