NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चीफ जस्टिस की कड़ी टिप्पणी
कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय को शामिल किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की.

कक्षा 8 की एनसीईआरटी (NCERT) की सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय को शामिल किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की. सुनवाई के दौरान अदालत ने इस विषय को बेहद गंभीर बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बच्चों को यह संदेश देना कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर कर सकता है. उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि क्या छात्रों को यह सिखाया जा रहा है कि देश की न्यायपालिका भ्रष्ट है. अदालत ने यह भी कहा कि जब विवादित किताब बाजार और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहले ही उपलब्ध हो चुकी है, तो बाद में उसे वापस लेना कितना प्रभावी होगा, यह भी चिंता का विषय है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि इस तरह का अध्याय पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि विवादित अध्याय तैयार करने से जुड़े व्यक्तियों को भविष्य में किसी मंत्रालय से नहीं जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी संबंधित सामग्री हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक को अवमानना नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि किताब की सभी हार्ड कॉपी और डिजिटल संस्करण तुरंत वापस लिए जाएं. कोर्ट ने साफ किया कि जब तक पूरी जांच कर जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती, तब तक मामले की सुनवाई जारी रहेगी. जरूरत पड़ने पर अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अदालत को बताया कि विवादित सामग्री डिजिटल माध्यमों में व्यापक रूप से फैल चुकी है, जिससे इसे पूरी तरह हटाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. वहीं एनसीईआरटी ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि संस्था न्यायपालिका का सम्मान करती है और यह अध्याय अनजाने में शामिल हो गया था. परिषद ने इस पर खेद जताते हुए विवादित सामग्री हटाने और अध्याय को दोबारा लिखने का फैसला लिया है.
गौरतलब है कि यह विवाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में शामिल “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक अध्याय को लेकर शुरू हुआ था, जिसे छात्रों को पढ़ाया भी जा रहा था. मामले की अगली सुनवाई होली के बाद 11 मार्च को निर्धारित की गई है, जहां अदालत आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी.

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