ईरान-अमेरिका वार्ता विफल, शेयर बाजार में हाहाकार; सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, निफ्टी भी लुढ़का
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया जब ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल हो गई. सोमवार को घरेलू बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया. बीएसई का Sensex 1,600 अंकों से ज्यादा टूट गया

Share Market: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया जब ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल हो गई. सोमवार को घरेलू बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया. बीएसई का Sensex 1,600 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 भी 400 अंकों से अधिक लुढ़क गया. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने मिलकर बाजार को हिला दिया. निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट आई और लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे तो बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट
सोमवार को शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. Sensex 1,600 अंक से ज्यादा गिरकर 75,900 के करीब पहुंच गया, जबकि Nifty 50 23,600 के नीचे आ गया. बाजार में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की घबराहट रही. सभी 30 सेंसेक्स शेयर लाल निशान में बंद हुए. ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया. निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए तेजी से शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार में अचानक गिरावट आई.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
इस गिरावट के दौरान कई बड़े शेयरों में भारी नुकसान दर्ज किया गया. InterGlobe Aviation, Asian Paints, Bajaj Finance, Maruti Suzuki और Bajaj Finserv के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो पीएसयू, रियल्टी, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर 2 से 3 फीसदी तक लुढ़क गए. इस गिरावट ने बाजार की व्यापक कमजोरी को दर्शाया और निवेशकों का भरोसा हिलाया.
कच्चे तेल और रुपये पर असर
वैश्विक तनाव का असर कच्चे तेल और मुद्रा बाजार पर भी पड़ा. Brent Crude की कीमतों में 8 फीसदी तक की तेजी आई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. वहीं भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 93 के स्तर के करीब पहुंच गया. तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है. इससे भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है.
वैश्विक बाजारों में भी गिरावट
ईरान-अमेरिका तनाव का असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशियाई बाजारों में भी देखने को मिला. Nikkei 225, KOSPI, Hang Seng और Shanghai Composite सभी में गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों में वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है. इसके अलावा Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते तनाव ने बाजार को और अस्थिर कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में और उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है.
गिरावट के पीछे की बड़ी वजह
बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत विफल होने से युद्ध की आशंका बढ़ गई है. इसके अलावा पिछले हफ्ते बाजार में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.

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