Sanjay Raut: बागी सांसदों पर फूटा संजय राउत का गुस्सा, बोले- गद्दारी इनके खून में है, गाली गलौज पर उतरे
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है.

Sanjay Raut: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है. नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे सांसदों पर तीखा हमला बोला और उन्हें लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. स्थिति तब और गंभीर दिखाई दी जब शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे. बाकी छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने पार्टी में संभावित टूट की अटकलों को और मजबूत कर दिया है. इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर उठ रहे सवालों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है.
सिर्फ तीन सांसद पहुंचे, बढ़ीं बगावत की अटकलें
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के केवल तीन सांसद—अरविंद सावंत, राजाभाऊ वाजे और अनिल देसाई—की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी. पार्टी के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों का कार्यक्रम से दूर रहना महज संयोग नहीं माना जा रहा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा चुका है और कई सांसद नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं. हाल के दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाएं भी तेज रही हैं, जिसके तहत कुछ सांसदों के पार्टी छोड़ने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सांसदों की गैरमौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है. इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे के सामने संगठनात्मक चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद पार्टी पहले ही बड़े राजनीतिक नुकसान का सामना कर चुकी है.
संजय राउत ने बागी नेताओं पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने बागी रुख अपनाने वाले नेताओं पर खुलकर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक के पद स्थायी नहीं होते, लेकिन पार्टी और उसके विचारों के प्रति निष्ठा सबसे महत्वपूर्ण होती है. राउत ने बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने नेताओं को पहचान और सम्मान दिया है, इसलिए उसे छोड़ना विश्वासघात के समान है. उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोगों की राजनीति अवसरवाद पर आधारित है और वे व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी के साथ विश्वासघात कर रहे हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत के तीखे तेवर साफ दिखाई दिए और उन्होंने बागी नेताओं के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. विपक्षी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस तरह की प्रतिक्रिया पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी और नेतृत्व की चिंता को भी दर्शाती है.
‘15 करोड़ एडवांस’ के दावे से मचा सियासी तूफान
संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये एडवांस देने की बात कही गई है. राउत ने कहा कि उन्हें एक महत्वपूर्ण व्यक्ति ने यह जानकारी दी है और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बड़े स्तर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त की कोशिश हो रही है. हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या दल का नाम नहीं लिया. इससे पहले भी राउत सोशल मीडिया पर इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने दावा किया था कि कुछ सांसदों को चार्टर्ड विमान से ले जाया गया और राजनीतिक सौदेबाजी की जा रही है. इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या दल-बदल के पीछे आर्थिक ताकतें सक्रिय हैं.
बागी सांसदों को चेतावनी, आगे क्या होगा?
संजय राउत ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों को जनता और शिवसैनिक माफ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि मौजूदा सांसद शिवसेना (UBT) के चुनाव चिन्ह ‘मशाल’ और उद्धव ठाकरे की मेहनत के दम पर जीतकर संसद पहुंचे हैं. इसलिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी छोड़ना उचित नहीं माना जा सकता. दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बागी सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग समूह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यदि ये सांसद अलग गुट बनाते हैं और बाद में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का समर्थन करते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है. फिलहाल सभी की निगाहें आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं.

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