रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा मामला: लबली देवी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई, ACB से मांगी गई केस डायरी
रिम्स की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी लबली देवी की अग्रिम जमानत याचिका पर ACB की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. कोर्ट ने जांच एजेंसी से केस डायरी मांगी है और मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की है.

रांची: रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़ा मामले में कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है. इस मामले में आरोपी बनाई गई लबली देवी की अग्रिम जमानत याचिका पर एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से संबंधित केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश एसीबी को दिया है. अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है. यह मामला रिम्स की वर्षों पहले अधिग्रहित की गई जमीन पर कथित अवैध कब्जे और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़ा है. जांच एजेंसियों के अनुसार, जमीन को निजी संपत्ति दर्शाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और वंशावली तैयार की गई थी. हाई कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई जांच में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मामले की जांच जारी है.
अग्रिम जमानत याचिका पर हुई सुनवाई
रिम्स भूमि विवाद मामले में आरोपी लबली देवी ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है. इस याचिका पर एसीबी की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. अदालत ने मामले के तथ्यों और जांच की स्थिति को समझने के लिए एसीबी से केस डायरी प्रस्तुत करने को कहा है. इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी.
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
जानकारी के अनुसार, झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश के बाद एसीबी ने जनवरी 2026 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी. अदालत ने कथित भूमि अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. इसके बाद एसीबी ने दस्तावेजों और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की.
चार आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
जांच के दौरान एसीबी ने अप्रैल 2026 में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था. एजेंसी का दावा है कि मामले में शामिल लोगों ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत से जमीन से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर की. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा आगे बढ़ाया गया और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
फर्जी दस्तावेज और वंशावली तैयार करने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, रिम्स की अधिग्रहीत जमीन को निजी स्वामित्व वाली भूमि के रूप में दर्शाने के लिए कथित रूप से फर्जी वंशावली और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए. आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन के स्वामित्व को लेकर भ्रम पैदा किया गया. हालांकि मामले से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला रिम्स के लिए अधिग्रहीत लगभग 9.65 एकड़ भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है. जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित भूमि पर समय के साथ विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य किए गए. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं कैसे हुईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

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